देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को 16वें वित्त आयोग के अध्यक्ष डॉ. अरविंद पनगढ़िया और अन्य सदस्यों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक में उत्तराखंड की वित्तीय आवश्यकताओं और चुनौतियों को मजबूती से रखा। सीएम धामी ने पर्यावरणीय सेवाओं की लागत, फ्लोटिंग आबादी के दबाव और आपदा प्रबंधन जैसी विशिष्ट हिमालयी चुनौतियों का हवाला देते हुए केंद्र से उपयुक्त क्षतिपूर्ति और विशेष अनुदान का आग्रह किया।
राज्य सचिवालय में आयोजित इस बैठक में मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि उत्तराखंड, अपनी व्यापक वन संपदा (70% से अधिक भूभाग) के कारण, पर्यावरण संरक्षण पर भारी व्यय करता है और विकास गतिविधियों पर प्रतिबंधों के चलते इको-सर्विस लागत भी वहन करता है।
उत्तराखंड की प्रमुख मांगें और तर्क:
राज्य की प्रगति और आयोग का आश्वासन:
मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले 25 वर्षों में राज्य ने वित्तीय प्रबंधन सहित विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की है। बजट का आकार एक लाख करोड़ रुपये पार कर गया है, बेरोजगारी दर में 4.4 प्रतिशत की कमी आई है, और प्रति व्यक्ति आय में 11.33 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जो राष्ट्रीय औसत से अधिक है।
आयोग के अध्यक्ष डॉ. पनगढ़िया ने आश्वासन दिया कि उत्तराखंड समेत अन्य पर्वतीय राज्यों द्वारा सामना की जा रही चुनौतियों के समाधान के लिए व्यापक स्तर पर विचार-विमर्श किया जाएगा। बैठक में राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे, और वित्त सचिव दिलीप जावलकर ने राज्य की विभिन्न चुनौतियों पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया।
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