UTTARAKHAND

उत्तराखण्ड: ‘रुकना नहीं, अब दौड़ने का वक्त’ – सीएम धामी ने अफसरों को दिया ‘तेज और पारदर्शी’ प्रशासन का मंत्र

देहरादून: उत्तराखण्ड को देश का अग्रणी राज्य बनाने की दिशा में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रशासनिक मशीनरी (Bureaucracy) के पेंच कसते हुए एक नया ‘वर्किंग कल्चर’ अपनाने का आह्वान किया है। शनिवार को मुख्यमंत्री आवास पर आयोजित ‘एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफिसर्स कॉन्फ्रेंस’ (AOC) के दौरान सीएम धामी ने आईएएस अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया कि अब “फाइलों को अटकाने का नहीं, बल्कि समाधान को धरातल पर उतारने का समय है।”

सीएम धामी ने अधिकारियों के साथ एक अनौपचारिक लेकिन गंभीर संवाद में प्रशासन को तेज (Fast), पारदर्शी (Transparent) और जन-केंद्रित (People-Centric) बनाने के लिए ‘ट्रिपल मंत्र’ दिया।

सीएम धामी के संबोधन की 5 बड़ी बातें:

  1. नौकरी नहीं, सेवा का भाव लाएं: मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को याद दिलाया कि सिविल सेवा (Civil Service) केवल एक पद या करियर नहीं है, बल्कि यह राष्ट्र और समाज की सेवा का एक सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा, “आपने यह सेवा धन या सुख-सुविधाओं के लिए नहीं, बल्कि बदलाव लाने के लिए चुनी है।”
  2. ‘पेंडिंग’ कल्चर खत्म हो: सीएम ने सख्त लहजे में कहा कि लालफीताशाही (Red Tape) और फाइलों में अनावश्यक देरी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। हर निर्णय ‘लक्ष्य-आधारित’ (Goal-oriented) होना चाहिए और योजनाओं का असर फाइलों के बजाय सीधे जनता के जीवन में दिखना चाहिए।
  3. अगले 5 साल निर्णायक: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “यह दशक उत्तराखण्ड का दशक होगा” वाले विजन को दोहराते हुए, सीएम धामी ने कहा कि आने वाले 5 साल राज्य के विकास के लिए निर्णायक हैं। हमें ऐसी रफ़्तार पकड़नी होगी कि हर नागरिक को सकारात्मक बदलाव महसूस हो।
  4. जनता का विश्वास ही पूँजी: उन्होंने कहा कि प्रशासन की छवि जनता के विश्वास पर टिकी होती है। यदि जनता की शिकायतें अनसुनी रह जाती हैं, तो यह पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है। इसलिए, ‘सरलीकरण, समाधान और निस्तारण’ के मंत्र पर काम करना होगा।
  5. रोल मॉडल बनें अफसर: टी.एन. शेषन और सूर्यप्रताप सिंह जैसे दिग्गज अधिकारियों का उदाहरण देते हुए सीएम ने कहा कि पद का सम्मान केवल कार्यकाल तक होता है, लेकिन आपके द्वारा किए गए अच्छे कार्यों का सम्मान जीवन भर रहता है।

मुख्यमंत्री का यह संबोधन केवल निर्देश नहीं, बल्कि राज्य की ब्यूरोक्रेसी के लिए एक स्पष्ट ‘रोडमैप’ है। अब देखना होगा कि ‘जीरो टॉलरेंस’ और ‘गुड गवर्नेंस’ के इस मंत्र को प्रशासनिक अमला कितनी तेजी से धरातल पर उतार पाता है।

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