
देहरादून: उत्तराखंड सरकार राज्य में आपदा जोखिम को कम करने और सटीक चेतावनी प्रणाली को बेहतर बनाने के लिए ‘अर्ली वार्निंग सिस्टम’ (Early Warning System) को अत्याधुनिक तकनीक से लैस करने जा रही है। उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (USDMA) ने विभिन्न जनपदों में ऑटोमेटेड वेदर स्टेशन (AWS) और डॉप्लर रडार स्थापित करने की प्रक्रिया तेज कर दी है।
10 जिलों में स्थापित होंगे ऑटोमेटेड वेदर स्टेशन (AWS)
सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास, विनोद कुमार सुमन ने जानकारी दी कि रक्षा भू-स्थानिक अनुसंधान प्रतिष्ठान (DGRE) के सहयोग से राज्य के 10 जिलों में आधुनिक वेदर स्टेशन लगाए जाएंगे।
- उत्तरकाशी और टिहरी: सबसे अधिक 8-8 स्टेशन।
- पौड़ी: 7 स्टेशन।
- देहरादून: 5 स्टेशन।
- रुद्रप्रयाग और बागेश्वर: 3-3 स्टेशन।
- अल्मोड़ा: 2 स्टेशन।
- नैनीताल और हरिद्वार: 1-1 स्टेशन।
इन स्टेशनों के माध्यम से मौसम की पल-पल की जानकारी मिलेगी, जिससे आपदा की स्थिति में समय रहते अलर्ट जारी किया जा सकेगा।
डॉप्लर रडार से होगी रियल टाइम मॉनिटरिंग
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) राज्य के देहरादून, अल्मोड़ा, चम्पावत और चमोली में से किन्हीं तीन जिलों में नए डॉप्लर रडार स्थापित करेगा। इन रडार की मदद से बादलों की आवाजाही, भारी वर्षा और अन्य मौसमी गतिविधियों की ‘रियल टाइम’ निगरानी संभव होगी। शासन ने संबंधित जिलाधिकारियों को इसके लिए जल्द से जल्द भूमि चयन कर प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए हैं।
तहसील स्तर तक फैलेगा कंट्रोल रूम का जाल
आपदा प्रबंधन को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए अब राज्य (SEOC) और जिला (DEOC) मुख्यालयों की तर्ज पर तहसील स्तर पर भी तहसील इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर (TEOC) स्थापित किए जाएंगे। इससे ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्यों में तेजी आएगी। इसके अलावा, रुद्रप्रयाग जिले की सफलता को देखते हुए अब हर जिले में डीडीआरएन (Disaster Dedicated Radio Network) बनाया जाएगा, ताकि आपदा के समय संचार व्यवस्था ठप न हो।
पोर्टल पर खर्च का ब्यौरा और जीआईएस मैपिंग
समीक्षा बैठक के दौरान सचिव ने सभी 13 जिलों को निर्देश दिए कि आपदा मद में किए गए खर्च का विवरण एनडीएमआईएस (NDMIS) पोर्टल पर समय पर अपलोड करें। साथ ही, आपदा से जुड़े उपकरणों की ‘जीआईएस मैपिंग’ की जाएगी और उनका विवरण आईडीआरएन (IDRN) पोर्टल पर डाला जाएगा।
सरकार ने लापता व्यक्तियों को मृत घोषित करने और उनके परिवारों को राहत सहायता प्रदान करने से जुड़े लंबित मामलों को भी प्राथमिकता के आधार पर निपटाने के सख्त निर्देश दिए हैं। इन आधुनिक कदमों से उत्तराखंड में आपदा के समय होने वाले जान-माल के नुकसान को न्यूनतम करने में बड़ी मदद मिलने की उम्मीद है।
