
देहरादून। उत्तराखंड में आगामी चारधाम यात्रा और पर्यटन सीजन को देखते हुए सरकार ने व्यावसायिक एलपीजी आपूर्ति को लेकर बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने नई मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी कर दी है, जिसके तहत राज्य में अब रोजाना 2650 कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। इससे होटल, रेस्टोरेंट और होम-स्टे संचालकों को गैस की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा।
क्यों लिया गया यह फैसला?
खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग के सचिव आनंद स्वरूप ने बताया कि चारधाम यात्रा के दौरान लाखों श्रद्धालु और पर्यटक प्रदेश में आते हैं। ऐसे में होटल, ढाबों और गेस्ट हाउसों में गैस की मांग कई गुना बढ़ जाती है। नियमित आपूर्ति न होने से पर्यटन व्यवसाय प्रभावित न हो, इसी को ध्यान में रखते हुए यह नई व्यवस्था लागू की गई है।
किस-किस को मिलेगा लाभ?
नई एसओपी के तहत इन प्रतिष्ठानों को प्राथमिकता दी जाएगी:
- होटल, रिसॉर्ट, रेस्टोरेंट और ढाबे।
- सरकारी गेस्ट हाउस और होम-स्टे।
- फार्मास्युटिकल इकाइयां और औद्योगिक कैंटीन।
- डेयरी, खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां और स्वयं सहायता समूह।
किसे कितने सिलेंडर मिलेंगे? (जिलावार कोटा)
सरकार ने जिलों में मांग के अनुसार सिलेंडर का बंटवारा किया है:
- देहरादून: 31% (सबसे अधिक)
- हरिद्वार और नैनीताल: 13-13%
- ऊधमसिंह नगर: 9%
- चमोली: 6%
- रुद्रप्रयाग: 5%
- टिहरी, पौड़ी, उत्तरकाशी और अल्मोड़ा: 4-4%
- पिथौरागढ़: 3%
- बागेश्वर और चंपावत: 2-2%
निगरानी के लिए डीएम को सौंपी जिम्मेदारी
तेल कंपनियों (IOCL, BPCL और HPCL) को निर्देश दिए गए हैं कि वे प्रतिदिन आपूर्ति की जानकारी संबंधित जिलाधिकारी (DM) को उपलब्ध कराएं। इससे पूरे राज्य में वितरण व्यवस्था की निगरानी प्रभावी तरीके से हो सकेगी और कालाबाजारी पर भी रोक लग सकेगी। पेट्रोलियम मंत्रालय के नियमों के तहत पर्यटन व्यवसाय के लिए दैनिक आवश्यकता का 20 प्रतिशत हिस्सा कमर्शियल सिलेंडरों के लिए आरक्षित रखा जाएगा।
