
नैनीताल: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने देहरादून के बहुचर्चित बिंदाल-रिस्पना एलिवेटेड रोड प्रोजेक्ट (Bindal-Rispana Elevated Road Project) के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने इस मामले को अभी ‘पोषणीय’ (Maintainable) न मानते हुए याचिका को खारिज कर दिया है।
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता को अभी तक भूमि अधिग्रहण के संबंध में कोई औपचारिक नोटिस प्राप्त नहीं हुआ है। कोर्ट ने कहा कि जब याचिकाकर्ता को नोटिस प्राप्त होगा, तब वे सक्षम फोरम (Appropriate Forum) के समक्ष अपनी आपत्तियां दर्ज करा सकते हैं। फिलहाल इस स्तर पर हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है।
देहरादून निवासी खुर्शीद अहमद ने यह जनहित याचिका दायर की थी। याचिका में निम्नलिखित प्रमुख चिंताएं जताई गई थीं:
- भूमि अधिग्रहण: प्रोजेक्ट के लिए बड़े पैमाने पर लोगों की भूमि का अधिग्रहण किया जा रहा है और डिमार्केशन (सीमांकन) की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
- पर्यावरण और आपदा का खतरा: याचिकाकर्ता का तर्क था कि इतने बड़े प्रोजेक्ट का भार वहां की भूमि सहन नहीं कर पाएगी, जिससे भविष्य में दैवीय आपदा का खतरा पैदा हो सकता है।
- आशियाने उजड़ने का डर: इस प्रोजेक्ट की जद में कई लोगों के घर और जमीन आ रही है, जिससे उनके विस्थापन की समस्या पैदा होगी।
राज्य सरकार की ओर से दलील दी गई कि यह जनहित याचिका समय से पहले दाखिल की गई है और कानूनी रूप से पोषणीय नहीं है। सरकार ने तर्क दिया कि चूंकि अभी तक याचिकाकर्ता को कोई नोटिस नहीं दिया गया है, इसलिए याचिका निरस्त की जानी चाहिए। कोर्ट ने सरकार के इस तर्क को स्वीकार करते हुए याचिका खारिज कर दी।
प्रोजेक्ट की मुख्य बातें: ₹6225 करोड़ का बजट
राजधानी देहरादून को जाम से मुक्ति दिलाने के लिए प्रस्तावित यह प्रोजेक्ट राज्य के सबसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में से एक है:
- कुल लंबाई: करीब 26 किलोमीटर (दो एलिवेटेड रोड)।
- विस्तार: रिस्पना नदी पर 11 किमी और बिंदाल नदी पर 15 किमी लंबी चार लेन रोड।
- लागत: इस प्रोजेक्ट के लिए ₹6225 करोड़ का बजट प्रस्तावित है।
- प्रभाव: दोनों नदियों के किनारों पर करीब 2600 से अधिक निर्माण (मकान व दुकानें) चिह्नित किए गए हैं, जो इस प्रोजेक्ट के दायरे में आ सकते हैं।
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद प्रोजेक्ट के आगे बढ़ने का रास्ता फिलहाल साफ नजर आ रहा है, हालांकि प्रभावित लोगों के पास नोटिस मिलने के बाद कानूनी विकल्प खुले रहेंगे।
