
देहरादून: उत्तराखंड में खेल और युवा प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से आयोजित ‘मुख्यमंत्री चैंपियनशिप ट्रॉफी’ का भव्य समापन हो गया है। देहरादून स्थित युवा कल्याण एवं प्रांतीय रक्षक दल निदेशालय के मिनी ग्राउंड में आयोजित समापन समारोह में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शिरकत की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने विजेता खिलाड़ियों को सम्मानित किया और प्रदेश की खेल प्रतिभाओं के लिए भविष्य की नई योजनाओं का खाका भी पेश किया।
23 दिसंबर से शुरू हुआ था खेल महाकुंभ
मुख्यमंत्री चैंपियनशिप ट्रॉफी के पहले संस्करण की शुरुआत 23 दिसंबर 2025 को हरिद्वार के सालिमपुर न्याय पंचायत स्थित खेल मैदान से हुई थी। यह प्रतियोगिता जमीनी स्तर से प्रतिभाओं को खोजने का एक बड़ा माध्यम बनी। इसका आयोजन चार चरणों में किया गया:
- न्याय पंचायत स्तर (662 न्याय पंचायतें)
- विधानसभा क्षेत्र स्तर (70 विधानसभाएं)
- संसदीय क्षेत्र स्तर (5 संसदीय क्षेत्र)
- राज्य स्तर
आंकड़ों में चैंपियनशिप का उत्साह
इस चैंपियनशिप में उत्तराखंड के युवाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। कुल 1,62,413 खिलाड़ियों ने इस महाकुंभ में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
- महिला-पुरुष भागीदारी: 1,01,444 पुरुष और 60,966 महिला खिलाड़ी शामिल हुए।
- वर्गवार भागीदारी: अंडर-14 में 82,510 खिलाड़ी, अंडर-19 में 79,686 खिलाड़ी और दिव्यांग वर्ग में 217 खिलाड़ियों ने दम दिखाया।
- स्तर के अनुसार: न्याय पंचायत स्तर पर सर्वाधिक 1,19,785 खिलाड़ी, जबकि राज्य स्तर पर 10,628 खिलाड़ी पहुंचे।
खिलाड़ियों के लिए तीन महत्वपूर्ण घोषणाएं
कार्यक्रम के दौरान खेल मंत्री रेखा आर्य ने खिलाड़ियों के हित में मुख्यमंत्री को एक मांग पत्र सौंपा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इन मांगों का परीक्षण करने के बाद इन्हें ‘सीएम घोषणा’ में शामिल करने की बात कही। ये तीन प्रमुख बिंदु हैं:
- मुख्यमंत्री खेल क्लब की स्थापना: ग्रामीण और शहरी स्तर पर खेल क्लबों का गठन किया जाएगा।
- हॉस्टल निर्माण: चैंपियंस ट्रॉफी के खिलाड़ियों और उनके प्रशिक्षण के लिए विशेष हॉस्टल बनाए जाएंगे।
- भोजन भत्ते में वृद्धि: युवा खिलाड़ियों के लिए भोजन (डाइट) दरों को बढ़ाया जाएगा।
“खिलाड़ियों को मिला अपनी प्रतिभा दिखाने का मंच”
समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि इस ट्रॉफी के माध्यम से प्रदेश के दूर-दराज के क्षेत्रों में रहने वाले बच्चों को भी अपनी खेल प्रतिभा दिखाने का एक सशक्त मंच मिला है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार खिलाड़ियों के प्रोत्साहन के लिए निरंतर काम कर रही है और सरकार की कोशिश है कि संसाधनों के अभाव में कोई भी प्रतिभा पीछे न छूटे।
इस कार्यक्रम ने न केवल राज्य में खेल संस्कृति को बढ़ावा दिया है, बल्कि आगामी राष्ट्रीय खेलों के लिए भी एक सकारात्मक माहौल तैयार किया है।
