UTTARAKHAND

नर्सिंग बेरोजगारों की ‘टंकी वाली जंग’ पर विराम: 60 घंटे बाद नीचे उतरे आंदोलनकारी; अभ्यर्थियों ने सरकार को दिया एक महीने का अल्टीमेटम

देहरादून | उत्तराखंड में वर्षवार नर्सिंग भर्ती की मांग को लेकर सर्वे चौक पर चल रहा 60 घंटे का हाई-वोल्टेज ड्रामा बुधवार को खत्म हो गया। सरकार से मिले ठोस आश्वासन के बाद कांग्रेस महिला प्रदेश अध्यक्ष ज्योति रौतेला समेत पांचों आंदोलनकारी पानी की टंकी से नीचे उतर आए हैं। नर्सिंग बेरोजगारों ने फिलहाल अपने साढ़े पांच महीने पुराने आंदोलन को एक महीने के लिए स्थगित कर दिया है।

1. 60 घंटे तक सांसें अटकी रहीं, SDRF ने उतारा नीचे

पिछले तीन दिनों से ज्योति रौतेला और 4 नर्सिंग अभ्यर्थी पानी की टंकी पर डटे हुए थे। प्रशासन और पुलिस के हाथ-पांव तब फूल गए थे जब एक प्रदर्शनकारी ने खुद पर पेट्रोल छिड़क लिया था। बुधवार को पुलिस प्रशासन, SDRF और फायर सर्विस की मौजूदगी में सभी को सुरक्षित नीचे उतारा गया।

  • भावुक स्वागत: टंकी से नीचे उतरते ही समर्थकों ने ‘ज्योति रौतेला जिंदाबाद’ के नारे लगाए और उन्हें फूल-मालाओं से लाद दिया। इस दौरान ज्योति रौतेला भावुक हो गईं। मौके पर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल सहित कई दिग्गज नेता मौजूद रहे।

2. क्यों अड़े थे नर्सिंग बेरोजगार? (मुख्य मांगें)

  • वर्षवार भर्ती: अभ्यर्थी मांग कर रहे हैं कि नर्सिंग पदों पर भर्ती ‘ईयर-वाइज़’ (Seniority based) हो।
  • हिमाचल मॉडल: बेरोजगारों ने सरकार को हिमाचल प्रदेश के शासनादेश का हवाला दिया है, जहां इसी तर्ज पर भर्तियां होती हैं।
  • साढ़े 5 महीने का संघर्ष: ये अभ्यर्थी पिछले 165 दिनों से धरने पर थे, लेकिन सुनवाई न होने पर उन्होंने टंकी पर चढ़ने जैसा आत्मघाती कदम उठाया।

3. स्वास्थ्य मंत्री का रुख: ‘हिमाचल मॉडल का करेंगे परीक्षण’

मामले के शांत होने पर स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि सरकार बेरोजगारों की मांगों के प्रति गंभीर है।

  • क्या बोले मंत्री: “हमें नर्सिंग बेरोजगारों का ज्ञापन मिला है। उन्होंने हिमाचल प्रदेश के शासनादेश की कॉपी भी दी है। विभाग इसका गहन परीक्षण करा रहा है। हालांकि, आज की कैबिनेट बैठक में इसका कोई एजेंडा नहीं था, लेकिन भविष्य में परीक्षण के बाद उचित फैसला लिया जाएगा।”

4. डीजी हेल्थ की कोशिशें लाईं रंग

मंगलवार शाम को स्वास्थ्य महानिदेशक (DG Health) डॉ. सुनीता टम्टा खुद धरनास्थल पहुंची थीं। उन्होंने आंदोलनकारियों से लंबी बातचीत की और भरोसा दिलाया कि उनका प्रस्ताव सरकार को भेजा जाएगा। हालांकि उस वक्त बात नहीं बनी थी, लेकिन बुधवार को सरकार की ओर से मिले पुख्ता भरोसे के बाद आंदोलनकारियों ने नीचे उतरने का फैसला किया।

TV10 INDIA विश्लेषण: फिलहाल राहत, लेकिन चुनौती बरकरार

नर्सिंग बेरोजगारों के नीचे उतरने से प्रशासन ने राहत की सांस ली है, लेकिन यह केवल ‘सीजफायर’ है। अभ्यर्थियों ने साफ किया है कि आंदोलन केवल 1 महीने के लिए स्थगित हुआ है, खत्म नहीं। अगर एक महीने के भीतर सरकार ने नियमावली में संशोधन या भर्ती प्रक्रिया पर ठोस निर्णय नहीं लिया, तो आंदोलन दोबारा और उग्र रूप में शुरू हो सकता है।

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