
देहरादून | उत्तराखंड में कुदरत के बदले मिजाज ने सबको चौंका दिया है। अप्रैल के पहले हफ्ते में जहां चिलचिलाती गर्मी शुरू हो जाती थी, वहां इस बार लोगों ने फिर से गर्म कपड़े निकाल लिए हैं। पहाड़ों में बर्फबारी और मैदानों में झमाझम बारिश के चलते तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई है। मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक ऐसा ही रुख बने रहने के संकेत दिए हैं।
खबर की खास बातें:
- धामों में बर्फबारी: केदारनाथ और यमुनोत्री धाम में ताजा बर्फबारी का सिलसिला जारी है।
- तापमान में गिरावट: राजधानी देहरादून में अधिकतम तापमान सामान्य से 6 डिग्री नीचे गिरकर 25.4°C पर पहुंचा।
- आज का अलर्ट: देहरादून, नैनीताल समेत 6 जिलों में ओलावृष्टि और 50 KM की रफ्तार से तूफान का ‘ऑरेंज अलर्ट’।
- वजह: पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के सक्रिय होने से बदला मौसम।
इन जिलों के लिए चेतावनी: रहें सावधान
मौसम विज्ञान केंद्र ने आज यानी 8 अप्रैल को प्रदेश के कई हिस्सों में ‘ऑरेंज अलर्ट’ जारी किया है।
- ऑरेंज अलर्ट: देहरादून, टिहरी, पौड़ी, नैनीताल, चंपावत और ऊधमसिंह नगर में बिजली चमकने के साथ ओलावृष्टि और तेज तूफान की संभावना है।
- येलो अलर्ट: अन्य जिलों में भी तेज हवाओं और हल्की बारिश का अनुमान है।
- बर्फबारी: 3000 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले इलाकों में भारी बर्फबारी हो सकती है।
अप्रैल में ‘दिसंबर’ जैसा अहसास
मंगलवार को हुई रुक-रुक कर बारिश और बर्फीली हवाओं ने ठंड बढ़ा दी है। दिन में कई बार बादलों की वजह से अंधेरा छा गया। दून में रात का तापमान भी सामान्य से 2 डिग्री कम होकर 14.5 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। पहाड़ों में यह अंतर और भी ज्यादा है, जहां दिन में भी लोग ठिठुरने को मजबूर हैं।
एक्सपर्ट व्यू: क्यों बदला मौसम?
मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, इस बदलाव की मुख्य वजह पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) का सक्रिय होना है। यह विक्षोभ अरब सागर और भूमध्य सागर से नमी लेकर उत्तर भारत पहुंचा है। इसके कारण बादलों का निर्माण हुआ और सूर्य की किरणें सीधे जमीन तक नहीं पहुंच पा रही हैं। हिमालयी क्षेत्रों से आ रही ठंडी हवाओं ने ‘सोने पर सुहागा’ का काम किया है, जिससे मैदानी इलाकों में भी पारा गिर गया।
लोगों को गर्मी से राहत, पर किसानों की बढ़ी चिंता
जहां एक ओर शहर के लोगों को गर्मी से राहत मिली है और मौसम सुहावना हो गया है, वहीं अचानक ओलावृष्टि और तेज हवाओं ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। ओलावृष्टि से फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका है।
