UTTARAKHAND

उत्तराखंड में आपदा प्रबंधन की बड़ी पहल: वसुधारा झील पर लगेगा पहला ‘अर्ली वार्निंग सिस्टम’, 8 नई वेधशालाओं से लैस होगी देवभूमि

प्राकृतिक आपदाओं के जोखिम को कम करने के लिए मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने सोमवार को एक उच्च-स्तरीय बैठक की।

देहरादून: उत्तराखंड सरकार राज्य में आपदाओं के सटीक पूर्वानुमान और जान-माल की सुरक्षा के लिए अत्याधुनिक तकनीक का सुरक्षा कवच तैयार कर रही है। चमोली स्थित वसुधारा झील राज्य की पहली ऐसी हिमनद (ग्लेशियर) झील बनने जा रही है, जहाँ ‘ग्लेशियर लेक आउटबर्स्ट फ्लड’ (GLOF) से बचने के लिए अर्ली वार्निंग सिस्टम (EWS) स्थापित किया जाएगा।

मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में हुई एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में राज्य में भूकंप और ग्लेशियर जोखिम न्यूनीकरण के कार्यों को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।

1. वसुधारा झील बनेगी ‘मॉडल पायलट साइट’

वाडिया हिमालय भू-विज्ञान संस्थान के सहयोग से वसुधारा झील को एक पायलट प्रोजेक्ट के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहाँ न केवल चेतावनी प्रणाली लगेगी, बल्कि रियल-टाइम मॉनिटरिंग और डिसीजन सपोर्ट सिस्टम भी स्थापित होगा।

  • वैज्ञानिक नियंत्रण: झील में पानी के स्तर को कम करने और नियंत्रित जल निकासी जैसे स्ट्रक्चरल उपायों पर भी काम होगा।
  • भविष्य की योजना: इस मॉडल की सफलता के बाद इसे राज्य की अन्य संवेदनशील ग्लेशियर झीलों पर भी लागू किया जाएगा। मुख्य सचिव ने इसके लिए 2026 से 2028 तक का विस्तृत रोडमैप तैयार करने के निर्देश दिए हैं।

2. भूकंप की आहट पहचानेंगे 500 नए सेंसर

भूकंप की दृष्टि से संवेदनशील उत्तराखंड में अब चेतावनी प्रणाली को और अधिक विस्तार दिया जा रहा है।

  • मजबूत नेटवर्क: राज्य में वर्तमान में 169 सेंसर और 112 सायरन काम कर रहे हैं। अब ‘राष्ट्रीय भूकंप जोखिम न्यूनीकरण कार्यक्रम’ के तहत 500 नए स्ट्रॉन्ग मोशन सेंसर लगाए जाएंगे। इसके अलावा 526 और सेंसर लगाने की भी योजना है।
  • IIT रुड़की के साथ करार: भूकंप पूर्व चेतावनी प्रणाली (EEWS) के बेहतर संचालन के लिए राज्य सरकार ने IIT रुड़की के साथ एक महत्वपूर्ण अनुबंध (MoU) किया है, जो 31 दिसंबर 2026 तक अलर्ट प्रसारण और सिस्टम के रखरखाव का जिम्मा संभालेगा।

3. आठ नए शहरों में खुलेंगी वेधशालाएं

राज्य में भूकंपीय निगरानी को सुदृढ़ करने के लिए 8 नए स्थानों पर स्थायी सिस्मोलॉजिकल वेधशालाएं (Observatories) स्थापित करने का प्रस्ताव है। ये वेधशालाएं रुड़की, देवप्रयाग, कर्णप्रयाग, रामनगर, बागेश्वर, अल्मोड़ा, केदारनाथ और चकराता में बनाई जाएंगी। वर्तमान में राज्य में 8 ऐसी वेधशालाएं पहले से ही संचालित हैं।

मुख्य सचिव का निर्देश:
मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी सुरक्षा प्रणालियों को तय समय सीमा के भीतर स्थापित किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि तकनीक और विज्ञान के मेल से ही आपदा के जोखिम को न्यूनतम किया जा सकता है।

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