देहरादून: उत्तराखंड सरकार राज्य में आपदाओं के सटीक पूर्वानुमान और जान-माल की सुरक्षा के लिए अत्याधुनिक तकनीक का सुरक्षा कवच तैयार कर रही है। चमोली स्थित वसुधारा झील राज्य की पहली ऐसी हिमनद (ग्लेशियर) झील बनने जा रही है, जहाँ ‘ग्लेशियर लेक आउटबर्स्ट फ्लड’ (GLOF) से बचने के लिए अर्ली वार्निंग सिस्टम (EWS) स्थापित किया जाएगा।
मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में हुई एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में राज्य में भूकंप और ग्लेशियर जोखिम न्यूनीकरण के कार्यों को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।
वाडिया हिमालय भू-विज्ञान संस्थान के सहयोग से वसुधारा झील को एक पायलट प्रोजेक्ट के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहाँ न केवल चेतावनी प्रणाली लगेगी, बल्कि रियल-टाइम मॉनिटरिंग और डिसीजन सपोर्ट सिस्टम भी स्थापित होगा।
भूकंप की दृष्टि से संवेदनशील उत्तराखंड में अब चेतावनी प्रणाली को और अधिक विस्तार दिया जा रहा है।
राज्य में भूकंपीय निगरानी को सुदृढ़ करने के लिए 8 नए स्थानों पर स्थायी सिस्मोलॉजिकल वेधशालाएं (Observatories) स्थापित करने का प्रस्ताव है। ये वेधशालाएं रुड़की, देवप्रयाग, कर्णप्रयाग, रामनगर, बागेश्वर, अल्मोड़ा, केदारनाथ और चकराता में बनाई जाएंगी। वर्तमान में राज्य में 8 ऐसी वेधशालाएं पहले से ही संचालित हैं।
मुख्य सचिव का निर्देश:
मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी सुरक्षा प्रणालियों को तय समय सीमा के भीतर स्थापित किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि तकनीक और विज्ञान के मेल से ही आपदा के जोखिम को न्यूनतम किया जा सकता है।
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