
उत्तरकाशी: आगामी चारधाम यात्रा को सुगम और सुरक्षित बनाने के लिए जिला प्रशासन ने कमर कस ली है। इस वर्ष यमुनोत्री धाम पैदल मार्ग पर घोड़ा-खच्चर संचालन को लेकर जिला प्रशासन एक विशेष ‘एसओपी’ (SOP) तैयार करने जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य बेजुबान जानवरों की सुरक्षा, उनके स्वास्थ्य का ध्यान रखना और यात्रा मार्ग पर होने वाली पशु क्रूरता को रोकना है।
शाम 6 बजे के बाद थमेगा संचालन
जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि इस वर्ष शाम 6 बजे के बाद यमुनोत्री पैदल मार्ग पर घोड़े-खच्चरों का संचालन पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। यह निर्णय यात्रियों और जानवरों दोनों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
पशु क्रूरता पर होगी सख्त कार्रवाई
डीएम ने जिला पंचायत और पशुपालन विभाग को संयुक्त रूप से एसओपी तैयार करने और पैदल मार्ग का निरीक्षण करने के निर्देश दिए हैं। पिछले वर्षों में यह देखा गया है कि अधिक मुनाफे के लालच में संचालक जानवरों से क्षमता से अधिक काम करवाते हैं, जिससे उनकी मृत्यु हो जाती है। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि इस बार यदि किसी जानवर पर अतिरिक्त बोझ डाला गया या उसके साथ क्रूरता की गई, तो संचालक के खिलाफ पशु क्रूरता अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया जाएगा।
ट्रैक पर भीड़ नियंत्रण के लिए नया फॉर्मूला
यात्रा मार्ग पर जाम और अव्यवस्था को रोकने के लिए प्रशासन ने संख्या निर्धारित की है:
- एक समय में ट्रैक पर अधिकतम 600 घोड़े-खच्चरों को ही अनुमति दी जाएगी।
- जब 100 घोड़े-खच्चर जानकीचट्टी वापस लौट आएंगे, तभी अगले 100 को धाम की ओर जाने की अनुमति मिलेगी।
जानवरों के लिए विशेष सुविधाएं
एसओपी के तहत जानवरों के स्वास्थ्य और कल्याण के लिए निम्नलिखित इंतजाम किए जाएंगे:
- पैदल मार्ग पर जानवरों के लिए गर्म पानी और चारे की नियमित व्यवस्था।
- बीमार या घायल जानवरों के लिए त्वरित उपचार।
- दुर्भाग्यवश किसी घोड़े-खच्चर की मृत्यु होने पर उसे दफनाने के लिए नियमित स्थान (बैरियल साइट) का चिह्नीकरण।
आंकड़ों पर एक नजर
यमुनोत्री पैदल मार्ग पर हर साल लगभग 3500 से 4000 घोड़े-खच्चरों का उपयोग होता है। पिछले वर्ष 3600 जानवरों का पंजीकरण किया गया था। मुख्य पशुचिकित्सा अधिकारी एच.एस. बिष्ट ने बताया कि जिलाधिकारी के निर्देशों के पालन में जल्द ही धरातलीय निरीक्षण कर एसओपी को अंतिम रूप दिया जाएगा।
प्रशासन के इस कदम से न केवल बेजुबान जानवरों को राहत मिलेगी, बल्कि यमुनोत्री धाम की यात्रा भी अधिक व्यवस्थित और मानवीय होगी।
