
महत्वपूर्ण बिंदु (Highlights):
- त्योहारों का इंतजार नहीं: अब प्रदेश में हर महीने चलेगा जांच अभियान, हॉट बाजारों में भी होगी सैंपलिंग।
- नई लैब: देहरादून में 31 मार्च 2026 तक बनकर तैयार हो जाएगी नई फूड टेस्टिंग लैब।
- सख्त कार्रवाई: बीते 2 सालों में 330 सैंपल हुए फेल, निर्माताओं और विक्रेताओं पर दर्ज हुआ मुकदमा।
देहरादून | खाद्य पदार्थों में मिलावट के कारण तेजी से बढ़ रहे कैंसर के मामलों को लेकर सरकार सख्त हो गई है। अब खाने-पीने की चीजों में कैंसर का कारण बनने वाले रसायनों (केमिकल्स) की पहचान करने के लिए सरकार एक नई नियमावली बनाने जा रही है। इसके साथ ही, मिलावटखोरों पर नकेल कसने के लिए अब सिर्फ त्योहारों पर ही नहीं, बल्कि हर महीने एक हफ्ते का विशेष जांच अभियान चलाया जाएगा।
विधानसभा सत्र के चौथे दिन, गुरुवार को प्रश्नकाल के दौरान स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने सदन में यह अहम घोषणाएं कीं।
कैंसर फैलाने वाले रसायनों की होगी पहचान
भाजपा विधायक बृजभूषण गैरोला ने सदन में खाद्य पदार्थों में मिलावट और बढ़ रहे कैंसर मरीजों का मुद्दा उठाया। इसके जवाब में स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने माना कि कैंसर के मरीज बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि इसे रोकने के लिए प्रतिष्ठानों का निरीक्षण कर सैंपल लिए जा रहे हैं। कैंसर का कारण बनने वाले रसायनों को चिह्नित करने के लिए सरकार जल्द ही एक सख्त नियमावली बनाएगी।
सिर्फ त्योहारों पर नहीं, अब हर महीने होगी जांच
भाजपा विधायक प्रेमचंद अग्रवाल ने सवाल उठाया कि फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) आमतौर पर सिर्फ त्योहारों पर ही ज्यादा सक्रिय होता है, जबकि मिलावट रोकने के लिए नियमित जांच होनी चाहिए।
- मंत्री का जवाब: स्वास्थ्य मंत्री ने इस बात को स्वीकार करते हुए घोषणा की कि अब सरकार हर महीने एक सप्ताह का विशेष अभियान चलाकर प्रदेशभर में खाद्य पदार्थों के सैंपल लेगी। गांवों और कस्बों में लगने वाले हॉट बाजारों में बिकने वाले खाने-पीने के सामान की भी जांच की जाएगी।
देहरादून में बन रही लैब, 28 पदों पर होगी भर्ती
सैंपलों की जांच रिपोर्ट जल्द आ सके, इसके लिए देहरादून में एक आधुनिक खाद्य विश्लेषण प्रयोगशाला (फूड टेस्टिंग लैब) बनाई जा रही है।
- 31 मार्च की डेडलाइन: मंत्री ने बताया कि 31 मार्च 2026 तक यह लैब पूरी तरह तैयार हो जाएगी।
- नई भर्तियां: खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग में अधिकारियों की कमी दूर करने के लिए ‘खाद्य सुरक्षा अधिकारी’ के 28 पदों पर भर्ती का प्रस्ताव राज्य लोक सेवा आयोग को भेज दिया गया है। जब तक स्थायी भर्ती नहीं होती, तब तक दूसरे विभागों के अधिकारियों को प्रतिनियुक्ति (डेप्युटेशन) पर तैनात किया जाएगा।
निकायों को भी मिल सकता है सैंपलिंग का अधिकार
भाजपा विधायक विनोद चमोली के एक सवाल के जवाब में स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि अभी सैंपल लेने और जांच के लिए भेजने का अधिकार सिर्फ FDA के पास है। सरकार इस बात पर विचार कर रही है कि नगर निगमों और स्थानीय निकायों को भी अपने क्षेत्र में खाद्य पदार्थों की सैंपलिंग और निरीक्षण का अधिकार दिया जाए। इसके लिए जल्द नीतिगत निर्णय लिया जाएगा।
फैक्ट फाइल: 2 साल में 330 सैंपल फेल
स्वास्थ्य मंत्री ने सदन में आंकड़े पेश करते हुए बताया कि पिछले दो वर्षों (2023-24 और 2024-25) में जांच के लिए कुल 3,311 सैंपल भेजे गए थे। इनमें से 330 सैंपल गुणवत्ता मानकों पर फेल पाए गए हैं। जिन उत्पादों के सैंपल फेल हुए हैं, उनके निर्माताओं और विक्रेताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए मुकदमे दर्ज किए गए हैं।
