
गोपेश्वर/औली। उत्तराखंड में मार्च के महीने में मौसम ने ऐसा रंग बदला है कि हर कोई हैरान है। रविवार रात हुई झमाझम बारिश और ऊंचाई वाले इलाकों में भारी बर्फबारी ने पहाड़ों को फिर से शीतकाल जैसा बना दिया है। औली से लेकर बदरीनाथ धाम तक की चोटियां सफेद चादर से ढक गई हैं, जिसे देख पर्यटक मंत्रमुग्ध हो गए हैं।
मार्च में बर्फबारी देख पर्यटक हैरान, यात्रा हुई यादगार
औली पहुंचे पर्यटकों के लिए यह किसी तोहफे से कम नहीं है। रुड़की से आए पर्यटकों का कहना था कि मार्च में बर्फ देखने की उम्मीद नहीं थी, लेकिन इस बेमौसम बर्फबारी ने उनकी यात्रा को यादगार बना दिया। सोमवार सुबह जब खिली धूप बर्फ पर पड़ी, तो नजारा बेहद मनोहारी हो गया।
बदरीनाथ में आधा फीट बर्फ, ट्रैकिंग रूट भी ढके
बदरीनाथ धाम में आधा फीट से अधिक बर्फ जमी है। वहीं, प्रसिद्ध ट्रैकिंग स्थलों जैसे रूपकुंड, वेदनी बुग्याल, ब्रह्मताल और बगजी बुग्याल में 1 से 2 फीट तक बर्फ दर्ज की गई है। सोमवार को ब्रह्मताल और वाण-वेदनी ट्रैक पर करीब 45 पर्यटक बर्फ का आनंद लेने के लिए निकले।
इन इलाकों में बढ़ा असर:
- बर्फबारी का दीदार: रामणी, पाणा, ईराणी, झींझी और लोहाजंग के ऊंचे गांव बर्फ की चादर में लिपटे नजर आए।
- बढ़ी ठंड: वाण, कुलिंग, घेस, हिमनी और दीदना जैसे गांवों में ठंडी हवाओं के कारण कड़ाके की ठंड लौट आई है, जिससे लोगों को दोबारा गर्म कपड़े निकालने पड़े।
- फसलों के लिए संजीवनी: हालांकि ठंड बढ़ी है, लेकिन कृषि वैज्ञानिकों और किसानों का मानना है कि यह बारिश और बर्फबारी फसलों और बागवानी के लिए बहुत लाभकारी है।
जंगलों की आग पर लगा ‘ब्रेक’, वन विभाग ने ली राहत की सांस
मौसम में आए इस बदलाव का सबसे सकारात्मक पक्ष जंगलों की आग रही। बारिश और बर्फबारी के चलते जंगलों में लगी आग खुद-ब-खुद बुझ गई है, जिससे वन विभाग और पर्यावरण प्रेमियों ने बड़ी राहत महसूस की है।
मैदानी इलाकों में भी दिखा असर:
पहाड़ों के साथ ही मैदानी क्षेत्रों में भी मौसम का मिजाज बदला है। सोमवार को धूप निकलने के बाद दोपहर में अचानक काले बादल छाए और बारिश शुरू हो गई, जिससे तापमान में फिर से गिरावट दर्ज की गई है।
