
मुंबई: भारतीय मुद्रा बाजार में गुरुवार को एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला। सोमवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले पहली बार 95 के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार करने वाला रुपया, आज शानदार रिकवरी करने में सफल रहा। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा सट्टेबाजी पर लगाम लगाने के लिए उठाए गए सख्त कदमों के बाद रुपये ने 1.6 प्रतिशत (151 पैसे) की ऐतिहासिक छलांग लगाई और 93.19 प्रति डॉलर के स्तर पर पहुंच गया।
कैसे मुमकिन हुई यह रिकवरी? (RBI के कड़े एक्शन)
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, रुपये में यह सुधार कोई सामान्य उतार-चढ़ाव नहीं बल्कि RBI का सोचा-समझा हस्तक्षेप है। केंद्रीय बैंक ने सट्टेबाजों को झटका देने के लिए दो प्रमुख कदम उठाए:
- सट्टेबाजी पर प्रहार: RBI ने बैंकों को निर्देश जारी किए हैं कि वे अब ग्राहकों को ‘रुपया-लिंक्ड नॉन-डिलिवरेबल डेरिवेटिव’ (NDD) कॉन्ट्रैक्ट नहीं दे सकेंगे। इससे रुपये के खिलाफ होने वाली ट्रेडिंग पर रोक लग गई।
- नेट ओपन पोजीशन (NOP) की सीमा: विदेशी मुद्रा बाजार में अस्थिरता को नियंत्रित करने के लिए बैंकों की ‘नेट ओपन पोजीशन’ की सीमा को 100 मिलियन डॉलर तक सीमित कर दिया गया है।
बाजार का मिजाज: गिरावट के बाद राहत
सोमवार की ऐतिहासिक गिरावट के बाद मंगलवार और बुधवार को महावीर जयंती व वार्षिक लेखाबंदी के कारण बाजार बंद रहा। गुरुवार सुबह जब बाजार खुला, तो रुपया 94.62 के स्तर पर था। लेकिन RBI की नई नीतियों के सकारात्मक असर के कारण कुछ ही घंटों में यह सुधरकर 93.19 पर आ गया।
रुपये में चमक, लेकिन शेयर बाजार में ‘ब्लैक आउट’
हैरानी की बात यह रही कि जहां एक तरफ रुपया मजबूत हुआ, वहीं घरेलू शेयर बाजार भारी बिकवाली की चपेट में आ गया।
- सेंसेक्स: 1,312 अंकों की भारी गिरावट के साथ 71,821 पर आ गिरा।
- निफ्टी: 410 अंक टूटकर 22,383 के स्तर पर बंद हुआ।
- FII की बिकवाली: विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने बाजार से करीब 8,331 करोड़ रुपये निकाल लिए, जिससे बाजार का सेंटिमेंट बिगड़ गया।
कच्चा तेल और डॉलर इंडेक्स: आने वाली चुनौतियां
रुपये के लिए खतरा अभी टला नहीं है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें 4.84% उछलकर 106.06 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई हैं। इसके अलावा डॉलर इंडेक्स (99.77) भी लगातार मजबूत हो रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि कच्चा तेल महंगा होने से भारत का आयात बिल बढ़ेगा, जो रुपये की मजबूती को दोबारा खतरे में डाल सकता है।
निष्कर्ष:
RBI के दखल से रुपये को ‘फ्री-फॉल’ (तेजी से गिरने) से फिलहाल बचा लिया गया है। हालांकि, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली आने वाले हफ्तों में भारतीय मुद्रा की स्थिरता की असली परीक्षा लेगी।
