
देहरादून। उत्तराखंड राज्य गठन के ढाई दशकों के इतिहास में दून घाटी के मौसम में आया बदलाव अब चिंताजनक स्तर पर पहुँच गया है। जिस शहर की पहचान कभी अपनी फुहारों और सुहावने मौसम से होती थी, आज वह भीषण गर्मी की चपेट में है। हालात की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी सविन बंसल ने सोमवार को जिले के कक्षा 1 से 12वीं तक के सभी स्कूलों में छुट्टी घोषित कर दी है।
देहरादून के इतिहास में यह संभवतः पहली बार है जब प्रशासन को ‘भीषण लू’ (Heatwave) के कारण स्कूलों को बंद करने का निर्णय लेना पड़ा है। अमूमन दून में भारी बारिश या अत्यधिक ठंड के कारण ही स्कूलों में अवकाश घोषित किया जाता रहा है, लेकिन तपते तापमान ने इस बार प्रशासन को बच्चों की सुरक्षा के लिए यह बड़ा कदम उठाने पर मजबूर कर दिया।
जिलाधिकारी सविन बंसल ने बताया कि मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार सोमवार को तापमान में और बढ़ोतरी होने और लू चलने की प्रबल संभावना है। छोटे बच्चों को इस झुलसाने वाली गर्मी से बचाने के लिए सोमवार को जिले के सभी सरकारी और निजी शिक्षण संस्थानों में अवकाश के आदेश जारी किए गए हैं।
पीने के पानी और प्याऊ को लेकर सख्त निर्देश
छुट्टी के आदेश के साथ-साथ जिलाधिकारी ने स्कूलों और प्रशासनिक अधिकारियों को अन्य महत्वपूर्ण निर्देश भी दिए हैं:
- स्कूलों के लिए: सभी स्कूलों को यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि परिसर में बच्चों के लिए पर्याप्त और ठंडे पेयजल की व्यवस्था हो।
- शहर के लिए: नगर निगम और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि शहर के विभिन्न स्थानों पर लगे प्याऊ (Water Stations) और वाटर कूलर चालू हालत में रहें। इनकी नियमित चेकिंग के भी आदेश दिए गए हैं।
दून की बदलती पहचान
कभी छोटी सी बदली छाने पर बरसने वाली दून की बारिश अब गुजरे जमाने की बात होती जा रही है। शहर का पारा अब मैदानी राज्यों के शहरों की तरह 40 डिग्री को पार करने लगा है। मौसम के इस बदलते मिजाज ने न केवल पर्यावरणविदों को बल्कि आम जनता को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है कि कभी ‘रिटायरमेंट पैराडाइज’ कहा जाने वाला यह शहर अब तपती भट्टी क्यों बनता जा रहा है।
