
चमोली (उत्तराखंड): सिखों के पवित्र तीर्थस्थल श्री हेमकुंड साहिब की यात्रा शुरू होने से पहले एक बड़ी और सुखद खबर सामने आई है। भारतीय सेना के जांबाज जवानों और गुरुद्वारे के सेवादारों ने तमाम बाधाओं को पार करते हुए बर्फ की सफेद चादर को चीरकर हेमकुंड साहिब में दस्तक दे दी है।
अरदास के साथ हुई सेवा की शुरुआत
शनिवार को जैसे ही सेना के जवान और सेवादार पवित्र परिसर में पहुंचे, पूरी घाटी ‘बोले सो निहाल, सत श्री अकाल’ के जयकारों से गूंज उठी। जवानों ने सबसे पहले गुरुद्वारे के मुख्य द्वार पर नतमस्तक होकर अरदास की और गुरु महाराज का आशीर्वाद लिया। अब ये जवान कपाट खुलने तक वहीं रुककर ‘आस्था पथ’ से बर्फ हटाने का मोर्चा संभालेंगे।
अटलाकोटी हिमखंड की चुनौती को किया पार
इस साल हेमकुंड साहिब का मार्ग भारी बर्फबारी के कारण चुनौतीपूर्ण बना हुआ था। मार्ग का सबसे बड़ा अवरोधक ‘अटलाकोटी हिमखंड’ था, जिसे काटना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं था। लेकिन 418 इंडिपेंडेंट फील्ड इंजीनियरिंग रेजिमेंट (नौवीं माउंटेन ब्रिगेड) के जवानों और गुरुद्वारे के समर्पित सेवादारों ने अपनी मेहनत से इस विशाल हिमखंड को काटकर रास्ता तैयार किया।
23 मई से शुरू होगी पावन यात्रा
श्री हेमकुंड साहिब के कपाट 23 मई को श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। गुरुद्वारा श्री हेमकुंड साहिब ट्रस्ट के अध्यक्ष नरेंद्र जीत सिंह बिंद्रा ने बताया कि पिछले दो दिनों से वहां लगातार बर्फबारी हो रही थी, जिससे काम में मुश्किलें आईं। उन्होंने कहा, “हमारे जवान और सेवादार बेहद विषम परिस्थितियों में काम कर रहे हैं। अब प्राथमिकता आस्था पथ से बर्फ हटाना है ताकि जब 23 मई को श्रद्धालु यहाँ पहुंचें, तो उन्हें किसी भी परेशानी का सामना न करना पड़े।”
सेना और सेवादारों के इस अटूट जज्बे ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि आस्था के आगे प्रकृति की हर चुनौती छोटी है। अब बस कुछ ही दिनों का इंतजार है, जब हेमकुंड साहिब की वादियां तीर्थयात्रियों के स्वागत के लिए पूरी तरह तैयार होंगी।
