
मसूरी: बॉलीवुड की जानी-मानी अभिनेत्री और रंगमंच का प्रतिष्ठित चेहरा हिमानी शिवपुरी शनिवार को अपने पैतृक शहर मसूरी पहुंचीं। अपने पुराने घर की चौखट पर कदम रखते ही अभिनेत्री भावुक हो गईं और उन्होंने बचपन की अनगिनत सुनहरी यादों को ताजा किया।
मसूरी की हवा में है जादुई सुकून
विशेष बातचीत के दौरान हिमानी शिवपुरी ने कहा, “मसूरी की ठंडी और पवित्र हवा में जो सुकून है, वह दुनिया के किसी और कोने में नहीं मिलता। यहाँ की वादियाँ मुझे एक नई ऊर्जा से भर देती हैं, और यही वह खिंचाव है जो मुझे बार-बार अपनी मिट्टी की ओर खींच लाता है।”
पिता की विरासत को किया याद
उन्होंने अपने दिवंगत पिता, प्रसिद्ध साहित्यकार और शिक्षक हरि दत्त भट्ट ‘शैलेश’ को याद करते हुए कहा कि उनके पिता ने अपना पूरा जीवन साहित्य और समाज के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने न केवल लेखन किया, बल्कि कई स्थानीय कलाकारों को मंच प्रदान कर उन्हें आकाशवाणी जैसे बड़े संस्थानों से जोड़ने में भी अहम भूमिका निभाई।
पलायन पर जताई चिंता, खुद गोद लिया पैतृक गांव
उत्तराखंड की सबसे बड़ी समस्या ‘पलायन’ पर बोलते हुए हिमानी शिवपुरी ने कहा कि पहाड़ों से लोगों का जाना बेहद दुखद है। उन्होंने बताया कि इसे रोकने के लिए वह व्यक्तिगत स्तर पर प्रयास कर रही हैं। उन्होंने अपने पैतृक गांव को गोद लिया है, जहां वह लगातार विकास कार्यों को बढ़ावा दे रही हैं। उन्होंने सरकार के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि हम सबको मिलकर अपनी जड़ों को बचाना होगा।
उत्तराखंड की संस्कृति पर फिल्म बनाने की इच्छा
हिमाचल और उत्तराखंड के लोक कलाकारों के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य की संस्कृति को विश्व स्तर पर पहचान दिलाने के लिए यहां के कलाकार अथक परिश्रम कर रहे हैं। अभिनेत्री ने अपनी भविष्य की योजनाओं का खुलासा करते हुए कहा, “मेरा सपना है कि मैं उत्तराखंड की अनूठी संस्कृति और यहाँ के अलौकिक प्राकृतिक सौंदर्य पर एक फिल्म बनाऊं, ताकि दुनिया हमारे प्रदेश की असल सुंदरता को देख सके।”
हिमानी शिवपुरी का यह दौरा न केवल उनकी निजी यादों से जुड़ा था, बल्कि उन्होंने इसके माध्यम से प्रदेश की संस्कृति और स्थानीय समस्याओं की ओर भी सबका ध्यान आकर्षित किया।
