
रुड़की | हॉलीवुड की किसी वॉर-थ्रिलर फिल्म जैसा खौफनाक मंजर… सिर के ऊपर से सनसनाती हुई मिसाइलें, आसमान में मंडराते सुसाइड ड्रोन और समंदर में जहाजों पर गिरता आग का मलबा। यह कोई कल्पना नहीं, बल्कि उत्तराखंड के रुड़की निवासी मर्चेंट नेवी कैप्टन आशीष शर्मा की आंखों देखी हकीकत है।
अमेरिका-ईरान और इजराइल के बीच चल रहे युद्ध के कारण कैप्टन आशीष 65 दिनों तक दुनिया के सबसे खतरनाक वॉर-जोन ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Strait of Hormuz) में फंसे रहे। मौत के साये में 65 दिन गुजारने के बाद सोमवार देर रात जब वे सुरक्षित अपने घर रुड़की पहुंचे, तो परिजनों की आंखें छलक पड़ीं। पूरा शहर आज उन्हें एक हीरो की तरह देख रहा है।
खबर की खास बातें (Key Highlights):
- 65 दिन का खौफ: कैप्टन आशीष अपने 24 क्रू मेंबर्स के साथ समंदर के बीचों-बीच युद्ध क्षेत्र में फंसे थे।
- 2500 जहाज फंसे: ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ बंद होने से दुनिया भर के करीब 2 से ढाई हजार जहाज और 20 हजार नाविक वहां फंसे हुए हैं।
- कटा संपर्क: युद्ध के दौरान सुरक्षा कारणों से जैमर लगा दिए गए थे, जिससे कैप्टन का परिवार से संपर्क पूरी तरह कट गया था।
- लीडरशिप की मिसाल: खुद मजबूत रहे और अपने साथियों का हौसला भी टूटने नहीं दिया।
कैप्टन की जुबानी: ‘आसमान से बरस रही थी मौत, मलबे से जहाजों में लगी आग’
रुड़की पहुंचने के बाद कैप्टन आशीष शर्मा ने भास्कर के साथ अपना खौफनाक अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया, “जैसे ही हमारे पास ऑर्डर आया कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद हो गया है, हमारा जहाज वहीं रुक गया। उस वक्त समंदर में हमारे साथ अलग-अलग देशों के करीब दो से ढाई हजार जहाज खड़े थे। ईरान की तरफ से UAE पर लगातार मिसाइलें और ड्रोन दागे जा रहे थे। जब ये मिसाइलें हवा में नष्ट होतीं, तो उनका जलता हुआ मलबा सीधे समंदर में गिरता। कई जगहों पर मलबा जहाजों पर गिरा, जिससे उनमें आग लग गई। वह मंजर बेहद डरावना था।”
जैमर लगे तो परिवार से टूटा संपर्क, UAE ने की मदद
कैप्टन शर्मा ने बताया कि शुरुआत में तो सैटेलाइट या अन्य माध्यमों से परिवार से बात हो पा रही थी, लेकिन बाद में मिलिट्री और सुरक्षा कारणों से इलाके में हैवी जैमर लगा दिए गए। इससे उनका बाहरी दुनिया से संपर्क कट गया। जहाज पर राशन और पानी को लेकर भी टेंशन थी, लेकिन इस मुश्किल वक्त में UAE सरकार ने उनका पूरा साथ दिया।
12 साथियों को पहले भेजा, खुद डटे रहे कैप्टन
कैप्टन आशीष की टीम में कुल 24 लोग थे। एक लीडर का फर्ज निभाते हुए उन्होंने 12 सदस्यों को सुरक्षित तरीके से पहले ही घर भेज दिया था। बाकी 12 सदस्यों के साथ वे जहाज की सुरक्षा के लिए वहीं डटे रहे। तीन दिन पहले ही वे अपनी ड्यूटी पूरी कर दुबई के रास्ते दिल्ली पहुंचे। कैप्टन के जज्बे को देखकर रुड़की के लोग गौरवान्वित हैं।
क्या है पूरा विवाद और ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज क्या है?
यह फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच एक बेहद संकरा समुद्री मार्ग है। दुनिया का करीब 25% समुद्री तेल व्यापार इसी रास्ते से होता है। ईरान-अमेरिका तनाव के बाद से ईरान ने इस मार्ग को ब्लॉक कर दिया है और किसी भी जहाज को गुजरने नहीं दे रहा है। कुछ भारतीय झंडे लगे जहाज जरूर यहां से क्रॉस हुए हैं, लेकिन फिलहाल यह पूरी तरह बंद है।
क्या है अमेरिका का ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश के बाद ‘US सेंट्रल कमांड’ ने होर्मुज में फंसे जहाजों को निकालने के लिए ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ शुरू किया है।
- ऑपरेशन का स्केल: इसमें 100 से ज्यादा लड़ाकू विमान, गाइडेड मिसाइल विध्वंसक पोत और 15,000 अमेरिकी सैन्यकर्मी शामिल हैं।
- ट्रंप का दावा: राष्ट्रपति ट्रंप के मुताबिक, युद्ध के कारण विभिन्न देशों के सैकड़ों जहाज और 20 हजार से ज्यादा नाविक फंसे हैं, जिन्हें सुरक्षित निकाला जा रहा है।
- ईरान का पलटवार: ईरान ने इस अमेरिकी ऑपरेशन का विरोध करते हुए इसे सीजफायर का उल्लंघन बताया है। ईरान ने उन अमेरिकी जहाजों को भी निशाना बनाया है जो फंसे हुए जहाजों को एस्कॉर्ट (गाइड) कर रहे थे, जिससे वहां तनाव चरम पर है।
