
देहरादून,। उत्तराखंड में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार, पोषण योजनाओं और जमीनी स्तर पर चलाए गए जागरूकता अभियानों का असर अब धरातल पर दिखाई देने लगा है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-5) की रिपोर्ट के ताजा विश्लेषण में राज्य की स्वास्थ्य स्थिति को लेकर कई सकारात्मक संकेत मिले हैं। विशेष रूप से बच्चों के पोषण, पूर्ण टीकाकरण और मातृ-शिशु स्वास्थ्य के संकेतकों में सुधार दर्ज किया गया है। हालांकि, इस रिपोर्ट में बदलती जीवनशैली से जुड़ी कुछ चुनौतियां भी सामने आई हैं, जिनमें बढ़ता मोटापा और पुरुषों में शराब का सेवन शामिल है।
खबर के मुख्य बिंदु (Key Highlights):
- कुपोषण में बड़ी कमी: 5 साल से कम उम्र के बच्चों में कम लंबाई (स्टंटिंग) का आंकड़ा 27 फीसदी से घटकर 20 फीसदी पर आ गया है।
- सुरक्षा कवच मजबूत: पूर्ण टीकाकरण पाने वाले बच्चों की संख्या 81.1% से सुधरकर अब 86% तक पहुंच गई है।
- घटा हाई ब्लड प्रेशर: राज्य में उच्च रक्तचाप (High BP) से पीड़ित पुरुषों का आंकड़ा घटकर 18.3% और महिलाओं का 14.5% रह गया है।
- मोटापे की चिंता: बदलती जीवनशैली के कारण 15 वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं में मोटापा बढ़कर 34.3% और पुरुषों में 27.1% हो गया है।
- नशे का चलन: पुरुषों में शराब का सेवन 25.5% से बढ़कर 27.2% हुआ, जबकि तंबाकू के इस्तेमाल में हल्की गिरावट दर्ज की गई।
बच्चों की सेहत सुधरी: कुपोषण के आंकड़ों में आई बड़ी गिरावट
उत्तराखंड के लिए सबसे सुखद खबर बच्चों के स्वास्थ्य क्षेत्र से है। 5 साल से कम आयु के बच्चों के पोषण स्तर में उल्लेखनीय सुधार हुआ है:
- कम लंबाई (Stunting): राज्य में उम्र के अनुपात में कम लंबाई वाले बच्चों का प्रतिशत घटकर 20% रह गया है, जो पहले 27% था。
- कम वजन (Underweight): इसी तरह कम वजन वाले बच्चों की संख्या भी पहले से घटकर 19.6 फीसदी पर आ गई है।
स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल का बयान:
“आंगनबाड़ी सेवाओं के सुदृढ़ीकरण, पोषण अभियान, गर्भवती महिलाओं की समय पर निगरानी और बच्चों को सही समय पर पूरक आहार उपलब्ध कराने के सरकारी प्रयासों का यह प्रत्यक्ष परिणाम है。 यह सुधार भावी पीढ़ी के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए बेहद सुखद संकेत है।”
टीकाकरण में उत्तराखंड ने मारी बाजी: 86% बच्चों को लगा सुरक्षा कवच
संक्रामक बीमारियों से बच्चों को बचाने के सरकारी प्रयास रंग ला रहे हैं। प्रदेश में पूर्ण टीकाकरण (Full Immunization) का स्तर 81.1 प्रतिशत से सुधरकर अब 86 प्रतिशत पर पहुंच चुका है।
स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा:
“वैक्सीनेशन कवरेज में सुधार से खसरा, पोलिया, डिप्थीरिया जैसी बीमारियों पर प्रभावी रोकथाम संभव हो पाएगी। सुदूर और दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाओं की सुलभ पहुंच का ही नतीजा है कि आज अभिभावकों में भी जागरूकता बढ़ रही है।”
राहत की बात: हाई ब्लड प्रेशर (BP) के मामलों में आई कमी
सर्वेक्षण में एक और सकारात्मक पहलू सामने आया है कि उत्तराखंड के लोगों में उच्च रक्तचाप (High BP) की समस्या पहले के मुकाबले कम हुई है:
- पुरुषों में हाई बीपी का स्तर घटकर 18.3 फीसदी रह गया है।
- महिलाओं में भी यह आंकड़ा घटकर 14.5 फीसदी पर आ गया है।
हालांकि, डॉक्टरों का मानना है कि यदि वजन बढ़ने (मोटापे) की प्रवृत्ति पर काबू नहीं पाया गया, तो भविष्य में यह आंकड़ा दोबारा बढ़ सकता है।
नई चुनौती: बदलती लाइफस्टाइल ने बढ़ाया मोटापा
स्वास्थ्य के कई मोर्चों पर सफलता हासिल करने के बावजूद, रिपोर्ट शहरीकरण और सुस्त जीवनशैली के चलते बढ़ रहे मोटापे की ओर इशारा करती है:
- महिलाओं में मोटापा: 15 वर्ष से अधिक आयु वर्ग की महिलाओं में मोटापे का स्तर 29.8% से बढ़कर अब 34.3% हो गया है।
- पुरुषों में मोटापा: पुरुषों में भी मोटापे की दर 27.1% दर्ज की गई है।
दफ्तरों में लंबे समय तक बैठने की आदत, व्यायाम की कमी, जंक फूड का अत्यधिक सेवन और मानसिक तनाव इस समस्या के मुख्य कारण हैं। महिलाओं में मोटापा बढ़ने से मधुमेह, हार्मोनल असंतुलन और हृदय रोगों का खतरा बढ़ जाता है।
नशे की आदतें: शराब का सेवन बढ़ा, तंबाकू में मामूली कमी
रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में पुरुषों के बीच शराब पीने की दर में थोड़ी बढ़ोतरी देखी गई है। यह आंकड़ा 25.5% से बढ़कर 27.2% हो गया है, जो स्वास्थ्य नीति निर्माताओं के लिए चिंता का विषय है। राहत की बात केवल इतनी है कि तंबाकू और धूम्रपान के सेवन में महिला और पुरुष दोनों श्रेणियों में आंशिक गिरावट देखी गई है।
