
मुंबई। पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में जारी युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव का सीधा असर अब भारतीय उपभोक्ताओं की रसोई और घरेलू बजट पर दिखने लगा है]. आनंद राठी की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, दैनिक उपयोग का सामान (FMCG) बनाने वाली कंपनियों ने कच्चे माल की बढ़ती लागत के कारण अपने कई प्रमुख उत्पादों की कीमतों में 3 से 10 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी कर दी है]. इस बढ़ोतरी के कारण बाजार में मिलने वाले रोजमर्रा के उत्पाद जैसे बिस्कुट, साबुन, तेल और अन्य घरेलू सामान महंगे हो गए हैं, जिससे सीधे तौर पर आम जनता की जेब पर बोझ बढ़ रहा है.
कंपनियां दाम बढ़ाने पर क्यों हुईं मजबूर?
पश्चिम एशिया संकट के कारण वैश्विक स्तर पर आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) बुरी तरह प्रभावित हुई है, जिससे कमोडिटी और अन्य कच्चे माल (क्रूड डेरिवेटिव्स जैसे प्लास्टिक और पाम ऑयल) की कीमतों में तेजी आई है. एफएमसीजी कंपनियों के सामने अपने प्रॉफिट मार्जिन (मुनाफे) को सुरक्षित रखने की बड़ी चुनौती थी. इनपुट लागत के इस भारी दबाव से निपटने के लिए कंपनियों ने धीरे-धीरे चुनिंदा श्रेणियों में कीमतों में इजाफा करना शुरू कर दिया है.
कीमतों में वृद्धि के बावजूद मांग मजबूत
रिपोर्ट के अनुसार, महंगाई और बढ़ी हुई कीमतों के बावजूद भारतीय उपभोक्ताओं की ओर से मांग कमजोर नहीं पड़ी है. वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही (Q4FY26) में एफएमसीजी सेक्टर ने राजस्व (रिवेन्यू) में 11 प्रतिशत की शानदार बढ़त दर्ज की है, जो पूरे वित्त वर्ष की 8 प्रतिशत की औसत वृद्धि से काफी बेहतर है.
इस वृद्धि के पीछे मुख्य रूप से दो बड़े कारक रहे हैं:
- प्रीमियम उत्पादों की मांग: बाजार में ग्राहक अब सामान्य उत्पादों के मुकाबले बेहतर गुणवत्ता वाले प्रीमियम उत्पादों को अधिक प्राथमिकता दे रहे हैं.
- वॉल्यूम में सुधार: जीएसटी (GST) से जुड़े शुरुआती इन्वेंट्री सुधारों के बाद बाजार सामान्य हुआ है, जिससे उत्पादों की बिक्री की कुल मात्रा (वॉल्यूम) में सुधार देखने को मिला है.
कंपनियों ने फिलहाल कीमतों में बढ़ोतरी कर अपने मुनाफे को तो संभाल लिया है, लेकिन आने वाले समय में उनकी मुश्किलें बढ़ सकती हैं. भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने साल 2026 में सामान्य से कम मानसून रहने की भविष्यवाणी की है, जिससे बारिश औसत से 10% कम रहने का अनुमान है. इसके साथ ही ‘अल नीनो’ की स्थिति भी चिंता का विषय बनी हुई है.
यदि कमजोर मानसून के कारण कृषि क्षेत्र और किसानों की आय प्रभावित होती है, तो आने वाले समय में ग्रामीण इलाकों से एफएमसीजी उत्पादों की मांग में बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है, जो इस सेक्टर के लिए एक बड़ी चुनौती साबित होगी.
