
नैनीताल (उत्तराखंड) :उत्तराखंड में वन भूमि, राष्ट्रीय राजमार्गों, राजकीय राजमार्गों और राजस्व भूमि पर हुए अवैध अतिक्रमण तथा हल्द्वानी के मुखानी चौराहे पर लंबे समय से लटके फ्लाईओवर निर्माण के मामले में नैनीताल हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है।
मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने दोनों जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए मुख्य सचिव, राज्य सरकार और जिलाधिकारी से दो सप्ताह के भीतर जवाब पेश करने को कहा है।
मुख्य बातें (Key Highlights)
- SC के आदेशों पर सवाल: कोर्ट ने पूछा— अतिक्रमण हटाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का उत्तराखंड में कितना अनुपालन हुआ?
- फोटोग्राफ के साथ रिपोर्ट मांगी: सभी जिलाधिकारियों (DMs) और डीएफओ (DFOs) को अतिक्रमण हटाने से पहले और बाद की तस्वीरों के साथ शपथपत्र दाखिल करने के आदेश।
- मुखानी चौराहे पर 71 को नोटिस: सरकार ने कोर्ट को बताया कि हल्द्वानी के मुखानी चौराहे से अतिक्रमण हटाने के लिए 71 लोगों को नोटिस जारी किया गया है।
- 6 साल से अटका फ्लाईओवर: 2018 में लाखों रुपये खर्च कर फ्लाईओवर का सर्वे कराया गया था, लेकिन सरकार ने आज तक इसकी रिपोर्ट कोर्ट में पेश नहीं की।
पदमपुरी की एक चिट्ठी से शुरू हुआ मामला पूरे राज्य में फैला
मामले की शुरुआत दिल्ली निवासी एक व्यक्ति द्वारा मुख्य न्यायाधीश को भेजे गए पत्र से हुई थी। पत्र में शिकायत की गई थी कि नैनीताल के पदमपुरी में वन विभाग और सड़क किनारे अफसरों की मिलीभगत से अवैध अतिक्रमण किया गया है, जिससे आम जनता को भारी परेशानी हो रही है।
हाईकोर्ट ने इस पत्र का स्वतः संज्ञान लेते हुए इसे जनहित याचिका के रूप में स्वीकार किया। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने इसका दायरा बढ़ाते हुए पूरे प्रदेश के राष्ट्रीय-राजकीय राजमार्गों, राजस्व और वन भूमि से अतिक्रमण हटाने के आदेश सभी DMs और DFOs को दिए थे।
आज सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से बताया गया कि कई इलाकों से अतिक्रमण हटा दिया गया है और फोटोग्राफ समेत रिपोर्ट कोर्ट में पेश कर दी गई है।
हल्द्वानी मुखानी चौराहा: 2018 में लाखों खर्च कर सर्वे हुआ, पर रिपोर्ट अब तक पेंडिंग
हल्द्वानी शहर को जाम मुक्त करने और कालाढूंगी रोड स्थित मुखानी चौराहे पर फ्लाईओवर निर्माण को लेकर दायर जनहित याचिका पर भी कोर्ट में सुनवाई हुई।
- याचिकाकर्ता की दलील: हल्द्वानी निवासी पूरन चंद्र जोशी ने साल 2018 में याचिका दायर कर बताया था कि मुखानी चौराहे पर आए दिन घंटों जाम लगा रहता है, जिससे स्कूली बच्चों, कर्मचारियों और आम मुसाफिरों का समय बर्बाद होता है।
- वकील का पक्ष: सुनवाई के दौरान अधिवक्ता दुष्यंत मैनाली ने कोर्ट को अवगत कराया कि साल 2018 में प्रशासन ने लाखों रुपये खर्च कर फ्लाईओवर का सर्वे कराया था, लेकिन कई साल बीत जाने के बाद भी राज्य सरकार ने इसकी रिपोर्ट अदालत में जमा नहीं की है।
- सरकार का रुख: राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि कई चौराहों से अतिक्रमण हटाकर सड़कें चौड़ी की जा रही हैं। मुखानी चौराहे पर 71 लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं।
हाईकोर्ट की खंडपीठ ने राज्य सरकार और जिलाधिकारी से पूछा है कि चिह्नित अतिक्रमण पर अब तक क्या कार्रवाई हुई, इसका पूरा विवरण दो हफ्ते के भीतर अदालत में दाखिल करें। मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद होगी।
