
हरिद्वार (उत्तराखंड)हरिद्वार में चल रहे कांवड़ मेले में शिवभक्तों का जनसैलाब उमड़ पड़ा है। अब तक 1.5 करोड़ से ज्यादा श्रद्धालु हरिद्वार पहुंच चुके हैं। गंगा के तेज बहाव और भारी भीड़ के बीच स्टेट डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (SDRF) और हरिद्वार पुलिस श्रद्धालुओं के लिए देवदूत साबित हो रही हैं।
SDRF की टीमों ने अब तक उफनती गंगा में डूब रहे 22 कांवड़ियों को रेस्क्यू कर नई जिंदगी दी है। वहीं, हरिद्वार पुलिस ने अपनी मुस्तैदी और मानवीय संवेदना का परिचय देते हुए भीड़ में अपनों से बिछड़ी एक 5 साल की बच्ची और मूक-बधिर महिला को उनके परिजनों से सकुशल मिलाया है।
मुख्य बातें :
- 22 जिंदगियां बचाईं: एसडीआरएफ ने गंगा के तेज बहाव में डूब रहे 22 कांवड़ियों को सुरक्षित बाहर निकाला।
- 9 टीमें 24 घंटे मुस्तैद: हरिद्वार (6), टिहरी (2) और पौड़ी (1) में तैनात; कांगड़ा घाट सबसे संवेदनशील घोषित।
- 5 की डूबने से मौत: चंडीगढ़ के 4 कांवड़ियों और 1 स्थानीय युवक के शव SDRF ने बरामद किए।
- बिछड़ों को मिलाया: पुलिस ने पिकअप में छूटी 5 साल की बच्ची और 4 दिन से भटक रही मूक-बधिर महिला को परिवार सौंपा।
कांगड़ा घाट सबसे खतरनाक: मोटरबोट और लाइफ जैकेट के साथ SDRF मुस्तै
SDRF के आईजी योगेंद्र सिंह रावत ने बताया कि कांवड़ मेले के दौरान हरिद्वार के गंगा घाट सबसे संवेदनशील क्षेत्र हैं। सुरक्षा के लिए 9 विशेष टीमें तैनात की गई हैं।
गंगा में डूबने के सबसे ज्यादा मामले कांगड़ा घाट पर सामने आए हैं। यहां बड़ी गंगा से भागीरथी बिंदु पर बने डैम से होकर तेज धारा हरकी पैड़ी की तरफ आती है। पानी गहरा और बहाव तेज होने के कारण कांवड़िए संतुलन खोकर बहने लगते हैं। इसलिए यहां SDRF की विशेष टीम 24 घंटे मॉनिटरिंग कर रही है। इसके अलावा मनसा देवी, नीलकंठ महादेव मार्ग और भूस्खलन संभावित पहाड़ी रास्तों पर भी पैनी नजर रखी जा रही है।
गंगा में डूबने से 5 हादसे भी हुए:
सुरक्षा इंतजामों के बावजूद कई श्रद्धालु चेतावनी की अनदेखी कर गहरे पानी में उतर रहे हैं। 5 दिन पहले हरिद्वार के जटवाड़ा पुल के पास गंगनहर में नहाते समय चंडीगढ़ के 4 कांवड़ियों की डूबने से मौत हो गई थी। वहीं, सोलानी नदी में डूबे एक स्थानीय युवक का शव भी सोमवार को SDRF ने रेस्क्यू कर बाहर निकाला।
“गंगा का तेज बहाव हर साल बड़ी चुनौती बनता है। कई श्रद्धालु सुरक्षा निर्देशों की अनदेखी करते हैं। रेस्क्यू टीमों को मोटरबोट, लाइफ जैकेट और आधुनिक संसाधनों से लैस किया गया है ताकि किसी भी सूचना पर तुरंत कार्रवाई की जा सके।”— योगेंद्र सिंह रावत, आईजी, SDRF
हरिद्वार पुलिस का मानवीय चेहरा: दो परिवारों में लौटा कांवड़ मेले का आनंद
भीड़भाड़ वाले कांवड़ मेले में हरिद्वार पुलिस केवल कानून-व्यवस्था ही नहीं संभाल रही, बल्कि बिछड़ों को अपनों से मिलाने का काम भी कर रही है। मंगलवार को पुलिस की तत्परता से दो भावुक कर देने वाले मामले सामने आए:
1. पिकअप में छूटी 5 साल की बच्ची, पुलिस ने चेस कर ढूंढा:
खुर्जा (यूपी) निवासी सुनीता अत्यधिक थकान के कारण अपनी 5 साल की बेटी नंदिनी को रास्ते में जा रहे एक पिकअप कांवड़ वाहन में बैठाकर खुद पीछे रह गईं। गाड़ी आगे निकल गई और मां घबरा गई। बहादराबाद बायपास पर तैनात एसआई हेमदत्त भारद्वाज को जब इसकी जानकारी मिली, तो पुलिस टीम ने तुरंत अलर्ट जारी किया। पुलिस अधिकारियों ने सरकारी गाड़ी से हाईवे पर चल रहे दर्जनों पिकअप वाहनों की तलाशी ली और आखिरकार साईं मंदिर के पास बच्ची को सकुशल ढूंढ निकाला।
2. 4 दिन से भटक रही मूक-बधिर महिला परिजनों से मिली:
कनखल के शंकराचार्य चौक पर एक मूक-बधिर महिला अपनी 2 साल की बेटी के साथ रोती हुई मिली थी। वह न बोल सकती थी और न सुन सकती थी। पुलिस उसे ‘वन स्टॉप सेंटर’ ले गई और सोशल मीडिया व पुलिस ग्रुप्स पर उसकी फोटो शेयर की। 4 दिन की कड़ी मशक्कत के बाद महिला के ससुर राजकुमार हरिद्वार पहुंचे। महिला की पहचान सुमन और बच्ची की शिवानी के रूप में हुई। अपनों को सामने देख सुमन की आंखें छलक पड़ीं।
“सुरक्षा व्यवस्था के साथ-साथ मानवीय संवेदनाओं को निभाना भी पुलिस की प्राथमिकता है। कंट्रोल रूम और हर पॉइंट पर तैनात पुलिसकर्मी मुस्तैद हैं। हमारा प्रयास है कि मेले में बिछड़े हर व्यक्ति को जल्द से जल्द उनके परिवार से मिलाया जाए।”— अभय सिंह, एसपी सिटी, हरिद्वार
