- जौनसार-बावर की लाइफलाइन कालसी-चकराता रोड जजरेड और टोंस मोड़ पर बंद, दो मशीनें तैनात
- टोंस मोड़ के पास पहाड़ी से आए मलबे व बरसाती पानी में बुरी तरह फंसी कार, कालसी पुलिस मौके पर
- चमोली के सिमली-ग्वालदम नेशनल हाईवे पर मोड़ा-छीड़ा और नारायणबगड़ में भारी मलबा, BRO ने तुरंत कराया साफ
- बीआरओ (BRO) की एडवांस प्लानिंग आई काम: संवेदनशील भूस्खलन जोनों पर पहले से तैनात हैं जेसीबी और पोकलेन

विकासनगर/थराली | उत्तराखंड में देर रात से हो रही मूसलाधार बारिश ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। बारिश के कारण नदियां-नाले उफान पर हैं और जगह-जगह भूस्खलन से सड़कें अवरुद्ध हो रही हैं। जौनसार-बावर की लाइफलाइन माना जाने वाला कालसी-चकराता मोटर मार्ग जजरेड और टोंस मोड़ के पास भारी मलबे के कारण बंद हो गया है। वहीं, टोंस मोड़ के पास पहाड़ी से अचानक मलबा और बरसाती पानी आने से एक कार मलबे में बुरी तरह फंस गई।
दूसरी ओर, चमोली जिले में सिमली-ग्वालदम नेशनल हाईवे पर सीमा सड़क संगठन (BRO) की मुस्तैदी से यात्रियों को बड़ी राहत मिली है।
कालसी-चकराता मार्ग बंद होने से दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। लोनिवि (पीडब्ल्यूडी) सहिया की सहायक अभियंता राधिका शर्मा ने बताया कि सुबह एक बार मार्ग को सुचारू कर दिया गया था, लेकिन लगातार बारिश से जजरेड और टोंस मोड़ के पास पहाड़ी से फिर भारी मलबा आ गया।
मलबे में फंसी कार को निकालने और सड़क से मलबा हटाने के लिए दो मशीनें लगाई गई हैं। मामले की सूचना कालसी एसडीएम को दे दी गई है और थाना कालसी की पुलिस टीम सुरक्षा व्यवस्था के लिए मौके पर तैनात है।
मानसून के दौरान चमोली जिले में लगातार हो रही बारिश से जहां कई राज्य मार्ग और ग्रामीण सड़कें बार-बार ठप हो रही हैं, वहीं सिमली-ग्वालदम राष्ट्रीय राजमार्ग पर बीआरओ (BRO) की सक्रियता से यातायात लंबे समय तक बाधित नहीं हो रहा।
- मोड़ा-छीड़ा में मलबा: मंगलवार को बारिश के चलते मोड़ा-छीड़ा के पास पहाड़ी से भारी पत्थर और मलबा आने से नेशनल हाईवे अवरुद्ध हो गया था। सूचना मिलते ही BRO की टीम JCB और पोकलेन मशीनों के साथ पहुंची और तुरंत मलबा हटाकर रास्ता खोल दिया।
- नारायणबगड़ बाजार में जलभराव: नारायणबगड़ बाजार में भी भारी बारिश से जलभराव और मलबे के कारण गाड़ियों की आवाजाही प्रभावित होने लगी थी, जिसे BRO की टीमों ने तत्काल साफ कर दिया।
‘मानसून से पहले ही संवेदनशील जगहों पर तैनात कर दी गई थीं मशीनें’“उच्च अधिकारियों के निर्देशानुसार मानसून शुरू होने से पहले ही सिमली-ग्वालदम राष्ट्रीय राजमार्ग के सभी भूस्खलन संभावित स्थलों (Landslide Zones) का चिन्हीकरण कर लिया गया था। वहां जेसीबी और पोकलेन मशीनें पहले से तैनात हैं। जैसे ही मलबा आने की सूचना मिलती है, मशीनें तुरंत काम शुरू कर देती हैं ताकि हाईवे कम से कम समय में खुल सके।”— जस्सू सिंह, सहायक अभियंता, BRO
एडवांस तैनाती से निर्बाध बनी हुई है आवश्यक सेवाएं
स्थानीय निवासियों और वाहन चालकों का कहना है कि मानसून के दौरान बीआरओ की त्वरित कार्रवाई और मशीनों की एडवांस तैनाती की रणनीति बेहद कारगर साबित हो रही है। अन्य ग्रामीण और प्रांतीय मार्गों की तुलना में सिमली-ग्वालदम हाईवे पर लंबा जाम नहीं लग रहा है और फल-सब्जी व आपातकालीन सेवाओं की आवाजाही बिना रुके जारी है।
