
रुद्रपुर (ऊधम सिंह नगर)। उत्तराखंड के रुद्रपुर में एक फूड इंडस्ट्री के मालिक पर किसानों की जमीन जबरन हड़पने और सरकारी चकरोड (रास्ते) पर कब्जा करने का गंभीर आरोप लगा है। पीड़ित किसानों का कहना है कि उद्योगपति खुद को सूबे के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का बिजनेस पार्टनर बताकर उन पर धौंस जमा रहा है और जमीन बेचने के लिए मानसिक दबाव बना रहा है। इस मामले को लेकर आक्रोशित किसानों ने सीओ और एसडीएम को शिकायती पत्र सौंपकर निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की है।
खास बातें :
- दबंगई का आरोप: लांबाखेड़ा गांव के किसानों ने शहर के उद्योगपति पवन कुमार अग्रवाल और उनके परिवार पर लगाए गंभीर आरोप।
- सीएम के नाम का इस्तेमाल: आरोप है कि उद्योगपति खुद को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का बिजनेस पार्टनर बताकर किसानों को डरा रहा है।
- रास्ता बंद करने की कोशिश: जमीन बेचने से मना करने पर खेतों की तरफ जाने वाले 70 साल पुराने सरकारी रास्ते को बंद करने का प्रयास किया गया।
- आंदोलन की चेतावनी: प्रशासनिक अधिकारियों ने मामले की जांच शुरू की; कार्रवाई न होने पर किसानों ने उग्र आंदोलन की चेतावनी दी।
सीएम का पार्टनर बताकर दबंगई का आरोप
रुद्रपुर कोतवाली क्षेत्र के लांबाखेड़ा गांव में एक फूड इंडस्ट्री स्थापित की जा रही है। पीड़ित किसान सोमनाथ बठला, गुरबक्श लाल बठला और दौलत राम ने एसडीएम और सीओ को सौंपे पत्र में आरोप लगाया कि ‘मैसर्स शिव श्री फूड इंडस्ट्री’ के मालिक पवन कुमार अग्रवाल, अंकित अग्रवाल और श्रुति अग्रवाल उन्हें लगातार परेशान कर रहे हैं। किसानों के मुताबिक, आरोपी पक्ष खुद को मुख्यमंत्री का व्यावसायिक साझीदार बताता है और धमकी देता है कि अगर उन्होंने अपनी कृषि भूमि नहीं बेची, तो उन्हें विभिन्न प्रकार की प्रशासनिक और अन्य परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
70 साल पुराना सरकारी रास्ता बंद करने की कोशिश
किसानों का कहना है कि वे अपनी पुश्तैनी कृषि भूमि किसी भी कीमत पर बेचने के इच्छुक नहीं हैं। जब उन्होंने जमीन बेचने से साफ इनकार कर दिया, तो उनके खेतों की ओर जाने वाले एकमात्र और करीब 70 वर्ष पुराने सरकारी चकरोड (सार्वजनिक रास्ते) को बंद करने की कोशिश की जा रही है। किसानों का आरोप है कि रास्ता बंद होने से उनकी खेती-किसानी प्रभावित होगी और उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। इस क्षेत्र में जमीन की खरीद-फरोख्त में बड़े पैमाने पर काले धन के इस्तेमाल की चर्चाएं भी गर्म हैं, जिसकी पीड़ित पक्ष जांच की मांग कर रहा है। हालांकि, आरोपी उद्योगपति पक्ष ने इन सभी आरोपों को पूरी तरह से निराधार और झूठा बताया है।
अधिकारियों के बयान:
“किसानों की शिकायत और संबंधित राजस्व दस्तावेज हमें मिल गए हैं। इस पूरे मामले की अत्यंत बारीकी से जांच कराई जा रही है। जांच में जो भी तथ्य और सच्चाई सामने आएगी, उसके आधार पर नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।”— मनीष बिष्ट, उप जिलाधिकारी (एसडीएम)
“शिकायती पत्र प्राप्त हो चुका है। चूंकि यह मामला संवेदनशील है, इसलिए इसके सभी पहलुओं और आरोपों की बारीकी से जांच की जा रही है। जांच रिपोर्ट के आधार पर निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।”— विभव सैनी, क्षेत्राधिकारी (सीओ)
कार्रवाई न होने पर आंदोलन की चेतावनी
इस पूरे प्रकरण से क्षेत्र के किसानों में भारी आक्रोश व्याप्त है। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकारी रास्ते पर किया जा रहा अतिक्रमण तुरंत नहीं रोका गया और मुख्यमंत्री के नाम पर किसानों को प्रताड़ित करने वाले लोगों पर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो वे प्रशासन के खिलाफ उग्र आंदोलन शुरू करने के लिए मजबूर होंगे। वहीं, प्रशासनिक अधिकारियों ने किसानों को आश्वस्त किया है कि जांच पूरी तरह से निष्पक्ष और तथ्यों के आधार पर की जाएगी।
