
देहरादून: अयोध्या के भव्य श्रीराम मंदिर में चढ़ावे और चंदे की कथित चोरी से जुड़ा विवाद इन दिनों सुर्खियों में है। इस मामले में एसआईटी की सघन जांच जारी है और अब तक कई आरोपियों को जेल भेजा जा चुका है। अयोध्या में उपजे इस विवाद से सबक लेते हुए उत्तराखंड में चारधाम के साथ लगभग 52 मंदिरों की व्यवस्था देखने वाली ‘बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति’ (BKTC) पूरी तरह सतर्क हो गई है। समिति ने भविष्य में किसी भी तरह के विवाद से बचने और व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी बनाए रखने के लिए एहतियातन कड़े कदम उठाए हैं।
सीईओ ने जारी किया कार्यालय ज्ञापन, लापरवाही पर कार्रवाई की चेतावनी
अयोध्या चंदा चोरी विवाद के बीच बीकेटीसी के मुख्य कार्याधिकारी (सीईओ) सोहन सिंह रांगड़ की ओर से एक महत्वपूर्ण कार्यालय ज्ञापन (लेटर) जारी किया गया है। इस निर्देश में समिति के अधीन आने वाले सभी मंदिरों में प्राप्त होने वाले दान, चढ़ावे, भेंट, विश्राम गृहों के किराए और अन्य स्रोतों से होने वाली आय के रख-रखाव और उसके लेखा-जोखा में पूर्ण पारदर्शिता बरतने को कहा गया है। साथ ही सीईओ ने चेतावनी दी है कि किसी भी स्तर पर कोई लापरवाही या वित्तीय अनियमितता पाई गई, तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
अयोध्या के घटनाक्रम का दिया गया स्पष्ट हवाला
गुरुवार को जारी इस पत्र में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि वर्तमान में अयोध्या स्थित श्रीराम मंदिर में दान और चढ़ावे के संबंध में मीडिया के माध्यम से गबन जैसी खबरें सामने आ रही हैं। ऐसे में बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के अधीन आने वाले मंदिरों में भविष्य में किसी भी प्रकार की शिकायत या विवाद की स्थिति न बने, इसके लिए विशेष सतर्कता बरतना आवश्यक है।
यह निर्देश सभी दान एवं भेंट गणना स्थलों, लेखा अनुभाग, खजाना, विश्राम गृहों और पूजा काउंटरों पर तैनात अधिकारियों एवं कर्मचारियों को भेजे गए हैं। पत्र में स्पष्ट कहा गया है कि मंदिरों को प्राप्त होने वाली धनराशि, सामग्री या अन्य प्रकार के चढ़ावे के संरक्षण और रख-रखाव में किसी भी स्तर पर कोताही नहीं होनी चाहिए और सभी प्राप्तियों का नियमानुसार व पारदर्शी तरीके से लेखा-जोखा रखा जाना चाहिए।
प्रभारी अधिकारियों को विशेष निगरानी के निर्देश
मंदिर समिति ने संबंधित प्रभारी अधिकारियों को विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं। निर्देश के अनुसार, प्रत्येक प्रभारी यह सुनिश्चित करेगा कि दान और चढ़ावे से जुड़ी समस्त प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुरूप संचालित हो तथा आय और सामग्री का रिकॉर्ड समय-समय पर अपडेट रखा जाए। समिति का मानना है कि एक पारदर्शी व्यवस्था न केवल श्रद्धालुओं के विश्वास को मजबूत करती है, बल्कि किसी भी तरह के विवाद और आरोपों से भी बचाती है।
इस आदेश की प्रतिलिपि बदरीनाथ और केदारनाथ के प्रभारी अधिकारियों, थाली भेंट प्रभारी, लेखाकार, खजांची तथा सभी विश्राम गृहों के व्यवस्थापकों और केयर टेकर्स को भी आवश्यक कार्रवाई हेतु भेजी गई है।
करोड़ों का चढ़ावा प्राप्त करती है समिति
बदरीनाथ और केदारनाथ धाम सहित मंदिर समिति के अधीन आने वाले मंदिरों में हर वर्ष देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं द्वारा करोड़ों रुपये का दान और चढ़ावा चढ़ाया जाता है। चारधाम यात्रा के दौरान इस राशि में काफी बढ़ोतरी हो जाती है। ऐसे में दान राशि और अन्य बहुमूल्य सामग्री के प्रबंधन में पारदर्शिता बनाए रखना समिति के लिए हमेशा से महत्वपूर्ण रहा है।
बीकेटीसी के अधीन आते हैं ये 47 प्रमुख मंदिर
‘बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति’ (BKTC) के अंतर्गत उत्तराखंड के कुल 47 प्रमुख मंदिर आते हैं। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
- बदरीनाथ धाम और केदारनाथ धाम
- त्रियुगीनारायण मंदिर, नरसिंह मंदिर, विश्वनाथ मंदिर, ओंकारेश्वर मंदिर, कालीमठ मंदिर
- ब्रह्मकपाल शिला एवं परिक्रमा- बदरीनाथ, तप्त कुंड, शंकराचार्य समाधि
- मद्महेश्वर, तुंगनाथ, रुद्रनाथ, कल्पेश्वर
- योगध्यान बदरी, भविष्य बदरी, आदि बदरी, वृद्ध बदरी
- माता मूर्ति मंदिर, वासुदेव मंदिर, गौरी कुंड मंदिर, आदिकेदारेश्वर मंदिर
- पांच शिला बदरीनाथ (नारद शिला, नृसिंह शिला, बाराही शिला, गरुड़ शिला और मार्कण्डेय शिला)
- पांच धाराएं (प्रह्लाद धारा, कूर्मा धारा, भृगु धारा, उर्वशी धारा और इंदिरा धारा)
- ऊखीमठ में उषा का मंदिर, कालिशिला और वसुधारा।
क्या है बीकेटीसी (BKTC)?
बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) एक वैधानिक संस्था है, जो वर्ष 1939 के अधिनियम के तहत कार्य करती है। यह समिति इन सभी बड़े मंदिरों की सुरक्षा, प्रबंधन, कपाट खुलने-बंद होने की तिथि और तीर्थयात्रियों के लिए बुनियादी सुविधाओं व बजट का पूरा काम देखती है। वर्तमान में भाजपा नेता हेमंत द्विवेदी बीकेटीसी के अध्यक्ष हैं।
हाल ही में हुई बीकेटीसी की बजट बैठक में चारधाम यात्रा 2026 के लिए ₹121 करोड़ का बजट पास किया गया था। चढ़ावे की महत्ता का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि देश के जाने-माने उद्योगपति मुकेश अंबानी ने हाल ही में मंदिर समिति को दर्शन के दौरान ₹10 करोड़ का दान दिया था, और पिछले साल भी उनके द्वारा ₹10 करोड़ की दान राशि दी गई थी।

