
हल्द्वानी,
हल्द्वानी स्थित उत्तराखंड वानिकी प्रशिक्षण अकादमी (UFTA) में वन आरक्षी (फॉरेस्ट गार्ड) प्रशिक्षण सत्र-2026 के प्रथम बैच का दीक्षांत समारोह गरिमामय वातावरण में आयोजित किया गया। छह महीने के कठिन प्रशिक्षण को सफलतापूर्वक पूरा करने वाले कुल 57 प्रशिक्षुओं को इस समारोह के दौरान प्रमाण पत्र और उपाधियां प्रदान की गईं।
सफलतापूर्वक प्रशिक्षण पूरा करने वाले इस बैच में राजस्थान के 33 और उत्तराखंड के 24 प्रशिक्षु शामिल रहे, जो अब सीधे तौर पर वन और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में अपनी सेवाएं देंगे।
पूर्व पीसीसीएफ चंद्र प्रकाश गोयल रहे मुख्य अतिथि
समारोह में केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (CEC) के चेयरमैन और पूर्व प्रमुख वन संरक्षक (PCCF) चंद्र प्रकाश गोयल ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। उनके साथ कुमाऊं क्षेत्र के मुख्य वन संरक्षक संजीव चतुर्वेदी सहित वन विभाग के कई अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। अधिकारियों ने दीक्षांत परेड की सलामी ली और नए वन आरक्षियों को भविष्य की जिम्मेदारियों के लिए शुभकामनाएं दीं।
परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रशिक्षु हुए सम्मानित
दीक्षांत समारोह के दौरान प्रशिक्षण और वार्षिक परीक्षा में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले प्रशिक्षुओं को विशेष तौर पर पदक और ट्रॉफियां प्रदान कर सम्मानित किया गया:
- स्वर्ण पदक: देहरादून वन प्रभाग के प्रशिक्षु गौरव कुमार ने परीक्षा में 89.86 प्रतिशत अंक हासिल कर पहला स्थान प्राप्त किया और स्वर्ण पदक अपने नाम किया।
- इसके अलावा वन वर्धन (Silviculture) एवं वन उपभोग, वन अभियांत्रिकी (Forest Engineering), सामुदायिक वानिकी (Community Forestry), सर्वश्रेष्ठ प्रशिक्षार्थी (Best Trainee) और परेड कमांडर जैसी विभिन्न श्रेणियों में विशिष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रशिक्षणार्थियों को भी ट्रॉफियां दी गईं।
“जंगलों की सुरक्षा के साथ पर्यावरण संरक्षण भी वन आरक्षियों की बड़ी जिम्मेदारी”
मुख्य अतिथि चंद्र प्रकाश गोयल ने नव नियुक्त वन आरक्षियों को संबोधित करते हुए कहा कि उनकी भूमिका केवल जंगलों की सुरक्षा तक ही सीमित नहीं है। वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता (Biodiversity) के संवर्धन और समाज को प्रकृति के प्रति जागरूक करने की भी उन पर बेहद महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। उन्होंने सभी प्रशिक्षुओं से पूरी ईमानदारी, अनुशासन और सेवा भावना के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने का आह्वान किया, जिससे भविष्य में वन संपदा और पर्यावरण संरक्षण को और अधिक मजबूती मिल सके।
