
- शनिवार शाम हुई मूसलाधार बारिश के बाद अचानक बढ़ा खीरगंगा का जलस्तर
- गंगोत्री हाईवे के नारदानों (जल निकासी रास्तों) में फंसा मलबा, बीआरओ ने मशीनरी लगाकर सुचारू कराया बहाव
- तेलगाड़ और खीरगंगा नदियों के उफान से भागीरथी का भी बढ़ा जलस्तर, हर्षिल पर मंडराया खतरा
उत्तरकाशी/हर्षिल।
उत्तराखंड की हर्षिल घाटी में शनिवार शाम को हुई तेज बारिश के कारण आपदा प्रभावित धराली क्षेत्र के बीच से बहने वाली खीरगंगा नदी अचानक उफान पर आ गई। नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने के कारण बहकर आए मलबे और भारी पत्थरों से गंगोत्री नेशनल हाईवे पर बने नारदाने (कलवर्ट/निकासी पाइप) पूरी तरह बंद हो गए। इससे राष्ट्रीय राजमार्ग के क्षतिग्रस्त होने और पानी के आबादी क्षेत्र में घुसने का गंभीर खतरा पैदा हो गया था।
बीआरओ (BRO) की तत्परता से टला बड़ा खतरा
गंगोत्री हाईवे पर मलबा जमा होने और पानी के सड़क पर बहने की सूचना मिलते ही सीमा सड़क संगठन (BRO) की मशीनरी और टीम तुरंत मौके पर पहुंची। बीआरओ के जवानों ने भारी मशीनों की मदद से नारदानों में फंसे पत्थरों और मलबे को हटाया। इसके बाद जलप्रवाह को हाईवे को नुकसान पहुंचाए बिना सुरक्षित रूप से नदी के मूल मार्ग की तरफ मोड़ा जा सका। कुछ घंटों की मशक्कत के बाद जब नदी का जलस्तर थोड़ा सामान्य हुआ, तब जाकर स्थानीय प्रशासन और ग्रामीणों ने राहत की सांस ली।
पिछले साल की आपदा याद कर सहमे ग्रामीण
शनिवार को खीरगंगा नदी के रौद्र रूप ने धराली गांव के लोगों के मन में एक बार फिर डर पैदा कर दिया। गौरतलब है कि पिछले साल (अगस्त 2025) में इसी खीरगंगा नदी में आई भीषण आपदा ने धराली गांव में भारी तबाही मचाई थी। उस दौरान कई होटल, आवासीय भवन और गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग का एक बड़ा हिस्सा जमींदोज हो गया था। स्थानीय ग्रामीण आज भी उस भयानक आपदा के जख्मों से उबर नहीं पाए हैं। इस मानसून सीजन में शनिवार को नदी का बहाव देख कुछ देर के लिए धराली में अफरा-तफरी और भय का माहौल बन गया था।
भागीरथी के कारण हर्षिल पर भी मंडराया खतरा
स्थानीय लोगों की चिंता केवल खीरगंगा तक ही सीमित नहीं है। हर्षिल घाटी की तेलगाड़ नदी के बाद अब खीरगंगा का जलस्तर भी बढ़ रहा है। ये दोनों नदियां सीधे भागीरथी नदी में जाकर मिलती हैं। सहायक नदियों के उफान पर होने के कारण भागीरथी नदी का जलस्तर भी तेजी से बढ़ रहा है, जिससे पर्यटन स्थल हर्षिल के निचले इलाकों को भी बाढ़ और भू-कटाव का सीधा खतरा पैदा हो गया है। प्रशासन ने नदी तटीय इलाकों में रह रहे लोगों और तीर्थयात्रियों को सतर्क रहने की हिदायत दी है।
