
- मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान (SIR) की समीक्षा कर दिए विशेष निर्देश
- पहाड़ी क्षेत्रों में न्याय पंचायत स्तर पर क्लस्टर कैंप और मैदानी इलाकों में वार्ड स्तर पर होगी सुनवाई
- 14 जुलाई से दोनों मंडलायुक्त (कमिश्नर) धरातल पर व्यवस्थाओं का जायजा लेने के लिए करेंगे फील्ड विजिट
देहरादून।
उत्तराखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान (एसआईआर – SIR) के तहत दावे और आपत्तियों के निस्तारण को अब अधिक सुगम बनाया जा रहा है। पर्वतीय और मैदानी क्षेत्रों के मतदाताओं की सुविधा के लिए अब न्याय पंचायत और वार्ड स्तर पर दावे-आपत्तियों की सुनवाई की जाएगी। उत्तराखंड के मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम ने गढ़वाल और कुमाऊं के मंडलायुक्तों व सभी जिलाधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान की प्रगति की समीक्षा की और इस संबंध में कड़े निर्देश जारी किए।
मानसून को देखते हुए लिया गया निर्णय
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने स्पष्ट किया कि आगामी चरणों— ड्राफ्ट पब्लिकेशन, नोटिस फेज और दावे-आपत्तियों के निस्तारण के दौरान मतदाताओं को मानसून के कारण किसी भी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। उन्होंने कहा कि पर्वतीय जिलों में बारिश के दौरान सड़कें बंद होने या भूस्खलन से आवाजाही प्रभावित होने की आशंका बनी रहती है। इसके समाधान के लिए पहले से ही विशेष इंतजाम किए जाएं।
- पहाड़ी क्षेत्रों के लिए योजना: दुर्गम व पहाड़ी इलाकों में दावे-आपत्तियों के निपटारे के लिए न्याय पंचायत स्तर पर क्लस्टर बनाकर कैंप लगाने का रोस्टर तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि मतदाताओं को दूर न जाना पड़े।
- मैदानी क्षेत्रों के लिए योजना: मैदानी जिलों के मतदाताओं की सुविधा के लिए केवल तहसील ही नहीं, बल्कि नगर निगम, नगर पंचायत और वार्ड स्तर पर विशेष कैंप आयोजित करने को कहा गया है।
सुनवाई केंद्रों पर मिलेंगी बुनियादी सुविधाएं, नोडल अधिकारी संभालेंगे मोर्चा
डॉ. पुरुषोत्तम ने निर्देश दिए कि जिन केंद्रों पर निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO) और सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (AERO) दावों व आपत्तियों की सुनवाई करेंगे, वहां बुनियादी सुविधाओं का पूरा प्रबंध होना चाहिए। इन केंद्रों पर बिजली, पानी, सुचारू इंटरनेट कनेक्टिविटी, स्कैनर और फोटोकॉपी मशीन की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी। इसके अलावा, ईआरओ और एईआरओ की सहायता के लिए शिक्षा, राजस्व और तहसील जैसे संबंधित विभागों से नोडल अधिकारी नामित किए जाएंगे, जो दस्तावेजों के भौतिक सत्यापन में मदद करेंगे।
बढ़ाई जाएगी एईआरओ की संख्या, 14 जुलाई से स्थलीय निरीक्षण
प्रदेश में वर्तमान में निर्वाचन कार्यों के सुचारू संपादन के लिए 70 ईआरओ के साथ 800 एईआरओ तैनात हैं। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि जिन जनपदों में काम की सुगमता के लिए एईआरओ की संख्या बढ़ाना जरूरी है, वे जनपद तत्काल अपने प्रस्ताव मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) कार्यालय को भेजें।
व्यवस्थाओं को धरातल पर परखने के लिए कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत और गढ़वाल कमिश्नर आनंद स्वरूप 14 जुलाई से जिलों के दौरे पर रहेंगे और विभिन्न मतदान केंद्रों व सुनवाई स्थलों का स्थलीय निरीक्षण करेंगे। इसके साथ ही, सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे समय से राजनीतिक दलों के साथ बैठक कर उन्हें ड्राफ्ट वोटर लिस्ट उपलब्ध कराएं।
इस महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत, गढ़वाल कमिश्नर आनंद स्वरूप, अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. विजय कुमार जोगदंडे, और संयुक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी प्रकाश चंद्र दुम्का सहित निर्वाचन विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
