
देहरादून। उत्तराखंड के देहरादून-ऋषिकेश मार्ग (भनियावाला से ऋषिकेश) के बीच सड़क चौड़ीकरण परियोजना को लेकर चल रहे विवाद पर राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने केंद्र से बातचीत के बाद फिलहाल 3,000 पेड़ों को काटे जाने की प्रक्रिया पर रोक लगा दी है। राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि जब तक सभी हितधारकों, स्थानीय नागरिकों और विशेषज्ञों के साथ संतोषजनक सहमति नहीं बन जाती, तब तक पेड़ों का कटान पूरी तरह स्थगित रहेगा।
खबर की 4 बड़ी बातें:
- बड़ा फैसला: भनियावाला-ऋषिकेश मार्ग पर 3000 पेड़ों के कटान को फिलहाल स्थगित किया गया।
- विपक्ष का दावा: कांग्रेस ने कहा- देहरादून पहुंचे राहुल गांधी के आश्वासन के बाद बैकफुट पर आई धामी सरकार।
- सरकार का रुख: विकास आवश्यक है, लेकिन जनभावना और पर्यावरण की अनदेखी कर कोई निर्णय नहीं लिया जाएगा।
- प्रोजेक्ट की खासियत: 3.5 किमी लंबा एलीफेंट अंडरपास और वन्यजीवों के लिए विशेष कल्वट का है प्रावधान।
राहुल गांधी के दौरे और अनिल जोशी के विरोध के बाद गर्माया मुद्दा
यह विवाद पिछले कुछ दिनों से स्थानीय नागरिकों, पर्यावरण प्रेमियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा व्यक्त की जा रही चिंताओं के बाद काफी चर्चा में था। हाल ही में अपने देहरादून दौरे के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी सीधे आंदोलन स्थल पहुंचे थे और पेड़ काटे जाने का विरोध कर रहे लोगों से मुलाकात की थी। राहुल गांधी ने प्रदर्शनकारियों को आश्वस्त किया था कि वे इस मुद्दे को संसद के सत्र में उठाएंगे।
इसके अलावा, हाल ही में पर्यावरणविद् पद्म भूषण डॉ. अनिल जोशी ने भी इस परियोजना के पर्यावरणीय पहलुओं पर गंभीर सवाल खड़े किए थे। इसके बाद इस मामले ने राजनीतिक और सामाजिक रूप से तूल पकड़ लिया।
क्या है NHAI की यह परियोजना?
यह परियोजना भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की एक महत्वपूर्ण अवसंरचना (Infrastructure) योजना है। सरकार का कहना है कि इस फोर/सिक्स लेन परियोजना पर माननीय उच्च न्यायालय के निर्देशों और सभी आवश्यक वैधानिक व पर्यावरणीय स्वीकृतियों के बाद ही कार्रवाई की जा रही थी।
वन्यजीवों के संरक्षण को ध्यान में रखते हुए इस प्रोजेक्ट में लगभग 3.5 किलोमीटर लंबा हाथी अंडरपास और छोटे वन्यजीवों के सुरक्षित आवागमन के लिए विशेष कल्वट (पुलिया) बनाने का भी प्रावधान किया गया है, ताकि इस मार्ग पर होने वाले मानव-वन्यजीव संघर्ष और सड़क दुर्घटनाओं को कम किया जा सके।
सरकार का पक्ष: “विकास जरूरी, लेकिन जनभावनाओं की अनदेखी नहीं”
पेड़ों के कटान पर रोक लगाने के साथ ही राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि उत्तराखंड की प्रकृति, जनभावनाएं और प्रदेश का विकास तीनों ही समान रूप से महत्वपूर्ण हैं. सरकार ने कहा कि वे केवल संवाद और सहमति के आधार पर ही आगे बढ़ना चाहते हैं.
इसी के तहत प्रमुख सचिव एवं संबंधित विभागों के अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे इस मामले में स्थानीय नागरिकों, विशेषज्ञों, जनप्रतिनिधियों और अन्य सभी हितधारकों से पुनः विस्तृत संवाद स्थापित करें. न्यायालय के निर्देशों का पूर्ण सम्मान करते हुए ही आगामी कदम उठाए जाएंगे.
कांग्रेस का दावा: राहुल गांधी के कारण बैकफुट पर आई सरकार
पेड़ों के कटान पर रोक लगने के बाद कांग्रेस ने इसे अपनी नैतिक जीत बताया है। उत्तराखंड कांग्रेस की प्रवक्ता गरिमा दसौनी ने कहा, “भनियावाला-ऋषिकेश मार्ग के ‘सात मोड़’ पर कई दिनों से लगातार पेड़ों का कटान चल रहा था। बीते रोज प्रदर्शनकारियों ने राहुल गांधी का काफिला रोककर उनसे मदद की गुहार लगाई थी। राहुल गांधी द्वारा संसद में इस मुद्दे को उठाने के आश्वासन के बाद ही धामी सरकार बैकफुट पर आई है, जिसके कारण कटान को तत्काल रोकना पड़ा है।”
