
मुख्य बिंदु:
- बड़ा फैसला: देहरादून-ऋषिकेश फोर/सिक्स लेन परियोजना के अंतर्गत ‘सात मोड़’ वन क्षेत्र में हो रहे पेड़ कटान पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रोक लगा दी है.
- सीएम की प्राथमिकता: मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की प्रकृति, जनभावनाएं और प्रदेश का विकास तीनों समान रूप से महत्वपूर्ण हैं. जब तक संतोषजनक सहमति नहीं बनती, तब तक पेड़ों का कटान स्थगित रहेगा.
- विस्तृत संवाद के निर्देश: सरकार ने प्रमुख सचिव और संबंधित अधिकारियों को स्थानीय नागरिकों, जनप्रतिनिधियों, पर्यावरणविदों और विशेषज्ञों से दोबारा चर्चा करने के निर्देश दिए हैं.
- वन्यजीव संरक्षण: परियोजना के तहत वन्यजीवों के सुरक्षित आवागमन के लिए 3.5 किलोमीटर लंबा हाथी अंडरपास और विशेष कल्वर्ट (पुलिया) बनाने का भी प्रावधान है.
देहरादून: उत्तराखंड के देहरादून-ऋषिकेश राष्ट्रीय राजमार्ग पर ‘सात मोड़’ के जंगलों में भानियावाला–जॉलीग्रांट–ऋषिकेश फोर-सिक्स लेन परियोजना को लेकर चल रहे विवाद के बीच मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक बड़ा निर्णय लिया है. मुख्यमंत्री ने जनभावनाओं और पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए परियोजना के दायरे में आने वाले 4,000 से अधिक पेड़ों की कटाई पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है.
सीएम धामी ने स्पष्ट किया है कि जब तक सभी हितधारकों और पक्षों के साथ संतोषजनक सहमति तथा विश्वास का माहौल नहीं बन जाता, तब तक इस परियोजना के अंतर्गत आने वाले पेड़ों का कटान पूरी तरह स्थगित रहेगा.
जनभावनाओं और विकास में संतुलन जरूरी: सीएम
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोशल मीडिया (X) पर इसकी जानकारी साझा करते हुए लिखा, “देहरादून–ऋषिकेश फोर/सिक्स लेन परियोजना को लेकर पिछले कुछ दिनों से अनेक नागरिकों, पर्यावरण प्रेमियों एवं स्थानीय लोगों द्वारा व्यक्त की जा रही चिंताओं और सुझावों का मैंने गंभीरता से संज्ञान लिया है”.
उन्होंने आगे कहा, “विकास हमारे लिए आवश्यक है, लेकिन जनभावनाओं, पर्यावरण और स्थानीय हितों की अनदेखी कर कोई निर्णय नहीं लिया जाएगा”. इसी उद्देश्य से प्रमुख सचिव और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे सभी हितधारकों, स्थानीय नागरिकों, जनप्रतिनिधियों और पर्यावरण विशेषज्ञों के साथ फिर से विस्तृत संवाद स्थापित करें.
विरोध में मनाया गया था ‘ब्लैक हरेला’, राहुल गांधी ने भी किया था हस्तक्षेप
इस हाईवे-चौड़ीकरण परियोजना के लिए बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई का स्थानीय लोग और पर्यावरण कार्यकर्ता पिछले कई दिनों से विरोध कर रहे थे. विरोध का आलम यह था कि हाल ही में हरियाली और पर्यावरण के पावन पर्व ‘हरेला’ पर प्रदर्शनकारियों ने सात मोड़ पर ‘काला हरेला’ (Black Harela) मनाकर विरोध दर्ज कराया था. विरोध प्रदर्शनों के दौरान पुलिस द्वारा कुछ लोगों को हिरासत में भी लिया गया था.
इसी बीच, उत्तराखंड के दौरे पर आए कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी जौलीग्रांट एयरपोर्ट के निकट आंदोलनकारियों से मुलाकात कर इस मुद्दे को संसद के चालू सत्र में उठाने का आश्वासन दिया था, जिसके बाद यह राजनीतिक रूप से भी बेहद संवेदनशील विषय बन गया. विपक्ष का दावा है कि राहुल गांधी के हस्तक्षेप और जनविरोध के बाद धामी सरकार को यह कदम उठाना पड़ा है.
वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए एलीफेंट कॉरिडोर और अंडरपास
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, यह परियोजना भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की एक महत्वपूर्ण अवसंरचना योजना है, जिस पर माननीय उच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों तथा सभी आवश्यक वैधानिक व पर्यावरणीय स्वीकृतियों के बाद ही कार्रवाई शुरू की गई थी.
शिवालिक वन क्षेत्र और हाथी गलियारे (Elephant Corridor) को ध्यान में रखते हुए इस सड़क परियोजना की डिजाइन में विशेष इंतजाम शामिल किए गए हैं:
- हाथी अंडरपास: वन्यजीवों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए करीब 3.5 किलोमीटर लंबा एलीफेंट अंडरपास बनाने का प्रावधान है.
- बॉक्स कल्वर्ट: छोटे वन्यजीवों के सुरक्षित आवागमन के लिए विशेष पुलिया (कल्वर्ट) बनाई जानी हैं, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष और सड़क दुर्घटनाओं में वन्यजीवों की मृत्यु की घटनाओं में कमी लाई जा सके.
सरकार ने साफ किया है कि माननीय उच्च न्यायालय के निर्देशों और फैसलों का पूर्ण सम्मान करते हुए ही आगे की कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी. फिलहाल पेड़ों के कटान पर रोक लगने से स्थानीय निवासियों और पर्यावरण प्रेमियों ने आंशिक राहत की सांस ली है.
