
Tv10 india खास:
- चंपावत में आयोजित ‘सावन उत्सव’ कार्यक्रम में शामिल हुईं सीएम पुष्कर सिंह धामी की पत्नी गीता धामी।
- बोलीं- “बिना पहचान के रह रहे हजारों लोग, कलावा बांधकर और फर्जी नाम से चला रहे काम।”
- दावा- 15 हजार कमाने वाले 10 हजार किराया दे रहे, प्रदेश भर में चल रहे सत्यापन अभियान में खुल रही पोल।
देहरादून/चंपावत: उत्तराखंड में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर राजनीतिक पार्टियां सक्रिय हो गई हैं। इस बीच मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के गृह विधानसभा क्षेत्र चंपावत में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान ‘लैंड जिहाद’, ‘लव जिहाद’ और ‘धर्मांतरण’ का मुद्दा गरमा गया है।
सावन के पावन पर्व पर ‘सेवा संकल्प फाउंडेशन’ द्वारा आयोजित ‘सावन उत्सव’ कार्यक्रम में मुख्यमंत्री की पत्नी गीता धामी शामिल हुईं। महिलाओं को संबोधित करते हुए गीता धामी ने धामी सरकार की उपलब्धियों का बखान किया और राज्य में चल रहे सत्यापन अभियान पर बड़ा बयान दिया।
‘कलावा बांधकर और हिंदू नाम से पहचान छिपा रहे लोग’
गीता धामी ने सत्यापन अभियान का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य में हजारों ऐसे लोग रह रहे हैं जो उत्तराखंड के मूल निवासी नहीं हैं और उनकी कोई स्पष्ट पहचान नहीं है।
उन्होंने कहा—
“यह लोग अपनी वास्तविक पहचान छिपाकर, हिंदू नाम रखकर और हाथों में कलावा बांधकर लोगों को बहलाने-फुसलाने का काम कर रहे हैं। कहीं ये रेस्टोरेंट चला रहे हैं, तो कहीं पहाड़ों में जमीनें किराए पर लेकर रह रहे हैं। सत्यापन में ऐसे मामले सामने आ रहे हैं कि जिनकी महीने की कमाई 15 हजार रुपये भी नहीं है, वे 10 हजार रुपये का किराया दे रहे हैं। ऐसे कई लोगों के हिंदू नाम से फर्जी आधार कार्ड बने हुए हैं।”
’10 हजार एकड़ से अधिक भूमि अवैध कब्जे से कराई मुक्त’
लैंड जिहाद का जिक्र करते हुए गीता धामी ने कहा कि समाज में कानून-व्यवस्था का होना बेहद जरूरी है। धामी सरकार ने समान नागरिक संहिता (UCC) लागू कर राज्य की बेटियों को समान अधिकार देने का काम किया है।
उन्होंने दावा किया कि उत्तराखंड में करीब 10 हजार एकड़ से अधिक सरकारी और वन भूमि पर अवैध कब्जा कर लिया गया था, जिसे सरकार ने ‘लैंड जिहाद’ के खिलाफ अभियान चलाकर मुक्त कराया है।
‘सत्यापन के बाद फर्जी पहचान वालों को वापस भेजा जाएगा’
गीता धामी ने स्पष्ट किया कि प्रदेश भर में चलाए जा रहे सत्यापन (Verification) अभियान का मुख्य उद्देश्य राज्य की सुरक्षा और सांस्कृतिक पहचान को बचाना है।
- वापसी की चेतावनी: उन्होंने कहा कि सत्यापन जांच में जिनकी पहचान फर्जी या संदिग्ध पाई जाएगी, उन्हें वहीं वापस भेजा जाएगा जहां से वे आए हैं।
- मदरसों पर कार्रवाई: सीएम धामी ने अल्पसंख्यक शिक्षा बोर्ड बनाकर अवैध रूप से चल रहे मदरसों पर कड़ा एक्शन लिया है और कई अवैध मदरसों को बंद कराया है।
- कड़ा धर्मांतरण कानून: राज्य सरकार ने प्रदेश में धर्मांतरण के खिलाफ सख्त कानून लागू किया है ताकि आने वाली पीढ़ियों को एक सुरक्षित उत्तराखंड मिल सके।
2027 चुनाव से पहले बढ़ा सियासी पारा
उत्तराखंड में धामी सरकार द्वारा चलाए जा रहे सत्यापन अभियान और अवैध निर्माणों पर ‘बुल्डोजर एक्शन’ के बीच गीता धामी के इस बयान के कई सियासी मायने निकाले जा रहे हैं। साल 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले भारतीय जनता पार्टी (BJP) राज्य की जनसांख्यिकी (Demography) और सुरक्षा के मुद्दे को जोर-शोर से जनता के बीच ले जा रही है, वहीं कांग्रेस भी अपने स्तर पर जनसंपर्क अभियान में जुटी हुई है।
