
मुख्य बिंदु (Highlights):
- BJP का प्रदर्शन: हल्द्वानी में SSP कार्यालय के बाहर BJP कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस नेताओं के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और प्रदर्शन किया।
- जांच की मांग: BJP नेता शंकर कोरंगा के नेतृत्व में SP सिटी के माध्यम से DGP को ज्ञापन भेजकर निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की गई।
- विवाद की वजह: 8 अगस्त की कांग्रेस रैली के दौरान गाड़ियों को रोकने का आरोप लगाकर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल और नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य समर्थकों के साथ SSP ऑफिस पहुंचे थे।
- BJP का आरोप: पहले से ट्रैफिक प्लान तय होने के बावजूद कांग्रेस नेताओं ने पुलिस अधिकारियों के साथ अमर्यादित आचरण किया, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
हल्द्वानी:
हल्द्वानी में कांग्रेस नेताओं और पुलिस प्रशासन के बीच शुरू हुआ विवाद अब खुलकर सियासी रंग लेने लगा है। SSP कार्यालय में कांग्रेस नेताओं द्वारा कथित तौर पर अभद्रता और अमर्यादित शब्दों के इस्तेमाल के विरोध में अब भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने मोर्चा खोल दिया है।
सोमवार को BJP नेता शंकर कोरंगा के नेतृत्व में बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता SSP कार्यालय पहुंचे। कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस और उसके शीर्ष नेताओं के खिलाफ जोरदार नारेबाजी करते हुए पुलिस महानिदेशक (DGP) के नाम SP सिटी को ज्ञापन सौंपा और मामले की उच्चस्तरीय जांच कराकर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
‘पहले से तय था ट्रैफिक प्लान, फिर भी किया हंगामा’
BJP नेता शंकर कोरंगा ने कांग्रेस नेताओं के आचरण पर सवाल उठाते हुए कहा कि 8 अगस्त को कांग्रेस के कार्यक्रम के लिए प्रशासन की ओर से पहले से अनुमति दी गई थी। शहर की यातायात व्यवस्था बाधित न हो, इसके लिए पुलिस प्रशासन ने बकायदा रूट और पार्किंग का ट्रैफिक प्लान तैयार किया था।
इसके बावजूद, रैली में आ रहे कार्यकर्ताओं के वाहनों को रोके जाने का आरोप लगाते हुए कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल और नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य के नेतृत्व में भारी संख्या में कांग्रेसी SSP कार्यालय में घुस गए।
‘पुलिस अधिकारियों से अभद्रता बर्दाश्त नहीं’
शंकर कोरंगा ने आरोप लगाया कि SSP कार्यालय के भीतर कांग्रेस नेताओं ने मर्यादा की सीमाएं लांघते हुए पुलिस अधिकारियों के साथ अभद्र भाषा का प्रयोग किया और उनके साथ अमर्यादित व्यवहार किया।
BJP नेताओं ने दो टूक कहा—
“पुलिस अधिकारियों के कार्यालय में घुसकर इस तरह का अभद्र व्यवहार किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है। कानून व्यवस्था बनाए रखने वाली पुलिस के साथ यदि जनप्रतिनिधि ऐसा आचरण करेंगे, तो समाज में क्या संदेश जाएगा? पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।”
बढ़ता जा रहा सियासी तनाव
8 अगस्त की घटना के बाद से ही पुलिस महकमे में रोष देखा जा रहा था, और अब BJP के मैदान में उतरने से मामले ने पूरी तरह राजनीतिक मोड़ ले लिया है। एक तरफ जहां कांग्रेस पुलिस प्रशासन पर रैली को बाधित करने और तानाशाही का आरोप लगा रही है, वहीं BJP इसे पुलिस के मनोबल को गिराने वाली अमर्यादित हरकत बताकर कांग्रेस को घेर रही है।
