
नैनीताल | उत्तराखंड में लंबे समय से लंबित लोकायुक्त की नियुक्ति के मामले में नैनीताल हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। वर्ष 2021 में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को दो सप्ताह के भीतर अब तक हुई प्रगति की स्थिति से कोर्ट को अवगत कराने के निर्देश दिए हैं।
मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ में हुई।
सरकार ने मांगा 1 महीने का समय, कोर्ट ने दी 2 हफ्ते की मोहलत
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत को अवगत कराया गया कि लोकायुक्त और उसके सदस्यों की नियुक्ति के लिए नियमावली तैयार की जा रही है। नियमों के तहत ही नियुक्ति करने वाली सर्च कमेटी का गठन होगा, जो चयन प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगी। सरकार ने तर्क दिया कि बिना नियमावली के लोकायुक्त एवं कार्यकारिणी की नियुक्ति संभव नहीं है, इसलिए नियमावली बनाने के लिए एक महीने का समय दिया जाए।
हालांकि, खंडपीठ ने सरकार की एक महीने की मोहलत की मांग को खारिज करते हुए सख्त निर्देश दिए कि दो सप्ताह के भीतर प्रक्रिया में क्या प्रगति हुई है, उसकी अद्यतन स्थिति से अदालत को अवगत कराया जाए। अब इस मामले की अगली सुनवाई दो हफ्ते बाद होगी।
क्या है पूरा मामला?
हल्द्वानी (गौलापार) निवासी रवि शंकर जोशी ने वर्ष 2021 में नैनीताल हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की थी। याचिका में कहा गया है कि:
- 2013 से खाली पड़ा है पद: राज्य में साल 2013 से ही लोकायुक्त का पद खाली पड़ा है।
- बगैर नियुक्ति के करोड़ों का खर्च: लोकायुक्त का पद रिक्त होने के बावजूद इस संस्थान के नाम पर हर साल 2 से 3 करोड़ रुपए का बजट खर्च हो रहा है।
- जांच एजेंसियों पर सरकारी नियंत्रण: याचिकाकर्ता के अनुसार, वर्तमान में राज्य की सभी जांच एजेंसियां (जैसे विजिलेंस) सरकार और पुलिस मुख्यालय के पूर्ण नियंत्रण में हैं। बिना शासन की पूर्व अनुमति के कोई भी एजेंसी राजपत्रित अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार का मुकदमा दर्ज नहीं कर सकती।
“कर्नाटक और मध्य प्रदेश की तर्ज पर हो पारदर्शी व्यवस्था”
जनहित याचिका में कर्नाटक और मध्य प्रदेश का उदाहरण देते हुए कहा गया कि वहां लोकायुक्त भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त और स्वतंत्र कार्रवाई कर रहे हैं। वहीं उत्तराखंड में स्वतंत्र जांच एजेंसी न होने के कारण छोटे से छोटे मामले को भी हाईकोर्ट के समक्ष लाना पड़ता है, जिससे अदालतों पर कार्यभार बढ़ता है।
याचिकाकर्ता ने मांग की है कि राज्य में भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने और नागरिकों को एक पारदर्शी व स्वतंत्र जांच व्यवस्था देने के लिए जल्द से जल्द लोकायुक्त की नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी की जाए।
