
नैनीताल/देहरादून | उत्तराखंड सरकार ने एक बड़ा प्रशासनिक निर्णय लेते हुए उत्तराखंड उच्च न्यायालय (High Court) को नैनीताल से हल्द्वानी स्थानांतरित करने के संबंध में प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान कर दी है। शासन द्वारा जारी आदेश के अनुसार, अब उच्च न्यायालय के नए और आधुनिक कॉम्प्लेक्स का निर्माण हल्द्वानी के लामाचौड़ क्षेत्र में किया जाएगा।
इस संबंध में प्रमुख सचिव (न्याय एवं विधि परामर्शी) अमित कुमार सिरोही द्वारा लोक निर्माण विभाग के सचिव (नोडल अधिकारी) को पत्र भेजकर भूमि हस्तांतरण और निर्माण संबंधी आगे की प्रक्रियात्मक कार्यवाही शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए गए हैं।
30 हेक्टेयर वन भूमि पर बनेगा नया हाईकोर्ट परिसर
शासनादेश के अनुसार, हल्द्वानी में तराई पूर्वी वन प्रभाग (रुद्रपुर) के भाखड़ा रेंज अंतर्गत लामाचौड़ ब्लॉक में स्थित कुल 73 हेक्टेयर वन भूमि में से 30 हेक्टेयर भूमि उच्च न्यायालय कॉम्प्लेक्स के लिए हस्तांतरित की जाएगी।
- कनेक्टिविटी: यह भूमि हल्द्वानी-रुद्रपुर राजमार्ग संख्या-05 से सटी हुई है, जो बेल बाबा मंदिर के पास प्लॉट संख्या 46 (36 हेक्टेयर) और 47 (37 हेक्टेयर) के अंतर्गत आती है।
- पूर्व निर्णय में संशोधन: इससे पहले 6 जून 2023 को गौलापार में 26.08 हेक्टेयर भूमि पर हाईकोर्ट स्थापित करने की सैद्धांतिक एवं प्रशासनिक स्वीकृति दी गई थी। राज्य सरकार ने अब उस फैसले को संशोधित करते हुए लामाचौड़ की 30 हेक्टेयर भूमि में हाईकोर्ट को रीलोकेट करने का अंतिम निर्णय लिया है।
हाईकोर्ट निबंधक और डीएम की रिपोर्ट के आधार पर फैसला
उच्च न्यायालय के महानिबंधक द्वारा 2 जुलाई 2026 को प्रेषित पत्र और नैनीताल के जिलाधिकारी द्वारा 14 मई 2026 को सौंपी गई स्थल निरीक्षण आख्या के आधार पर लामाचौड़ की इस भूमि को हाईकोर्ट परिसर के निर्माण के लिए सबसे उपयुक्त पाया गया। राज्य सरकार द्वारा इस प्रस्ताव पर गहन विचार-विमर्श करने के बाद राज्यपाल की सहर्ष प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई है। इस फैसले के बाद हल्द्वानी में एक विशाल और अत्याधुनिक न्यायिक परिसर बनने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है।
नैनीताल के मौजूदा परिसर का राज्य सरकार करेगी अन्य उपयोग
शासन द्वारा जारी आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि हल्द्वानी में नए परिसर में उच्च न्यायालय का संचालन शुरू होते ही, नैनीताल स्थित मौजूदा संपूर्ण न्यायिक परिसर को राज्य सरकार अपने अधिकार में लेगी। इस ऐतिहासिक परिसर का उपयोग अन्य प्रशासनिक कार्यों, सरकारी गतिविधियों या मुद्रीकरण (Monetization) के लिए किया जाएगा।
न्याय विभाग ने संबंधित सभी विभागों को हस्तांतरण से जुड़ी कागजी और मैदानी प्रक्रियाओं को जल्द से जल्द पूरा करने को कहा है ताकि नए हाईकोर्ट परिसर के निर्माण कार्य को तेजी से शुरू किया जा सके।
