4,000 वर्ग किमी में फैले जोन में सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का होगा कड़ाई से पालन; पर्यावरण संरक्षण के साथ स्थानीय लोगों की सुविधाओं का भी रखा जाएगा ध्यान

देहरादून: उत्तराखंड के संवेदनशील भागीरथी इको सेंसेटिव जोन (BESZ) में नियमों के उल्लंघन और अवैध निर्माणों पर अब केंद्र और राज्य सरकार मिलकर सख्त कदम उठाने जा रही है। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) ने इसके लिए एक मजबूत और प्रभावी ‘संस्थागत तंत्र’ (Institutional Mechanism) तैयार करने का निर्णय लिया है। यह तंत्र BESZ अधिसूचना के प्रावधानों को धरातल पर पूरी तरह लागू कराने के साथ-साथ 24×7 निगरानी का काम भी करेगा।
नई दिल्ली में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्री भूपेंद्र यादव और उत्तराखंड के मुख्य सचिव आनंद वर्द्धन सहित दोनों महकमों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। बैठक में भागीरथी के पर्यावरणीय, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व को सुरक्षित रखने के साथ-साथ स्थानीय जनता को जरूरी सहूलियतें देने पर सहमति बनी।
बैठक से जुड़ी 3 बड़ी बातें
- मजबूत मॉनिटरिंग सिस्टम: 4 हजार वर्ग किमी में फैले भागीरथी इको सेंसेटिव जोन में नियमों के उल्लंघन पर त्वरित और सख्त कानूनी कार्रवाई के लिए नया संस्थागत ढांचा बनेगा।
- सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का अनुपालन: शीर्ष अदालत के आदेशों और वर्ष 2020 में तैयार ‘जोनल मास्टर प्लान’ के तहत जुड़े 12 विभागों के कार्यों को और अधिक मजबूती से लागू किया जाएगा।
- अवैध निर्माण पर जांच: मंत्रालय के पत्र के बाद जिला प्रशासन अवैध निर्माण के मामलों की सघन जांच कर रहा है, जिस पर जल्द बड़ी कार्रवाई संभव है।
सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व से कोई समझौता नहीं: केंद्रीय मंत्री
बैठक के बाद केंद्रीय वन मंत्री भूपेंद्र यादव ने सोशल मीडिया पर जानकारी साझा करते हुए स्पष्ट किया:
“भागीरथी नदी और इसके आसपास के क्षेत्रों के सांस्कृतिक, पर्यावरणीय और आध्यात्मिक महत्व को देखते हुए अधिसूचना के प्रावधानों को पूरी तरह लागू किया जाना आवश्यक है। इसके लिए एक प्रभावी संस्थागत व्यवस्था बनाई जाएगी, जिससे सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का अक्षरशः पालन सुनिश्चित हो सके।”
12 विभागों की जिम्मेदारी, 4000 वर्ग किमी में फैला है क्षेत्र
भागीरथी इको सेंसेटिव जोन का दायरा करीब 4,000 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है।
- जोनल मास्टर प्लान 2020: इस संवेदनशील क्षेत्र के लिए वर्ष 2020 में मास्टर प्लान तैयार किया गया था, जिसमें वन, पर्यटन, राजस्व और लोक निर्माण सहित 12 अलग-अलग विभागों के दायित्व तय किए गए थे।
- दोहरी निगरानी प्रणाली: क्षेत्र में किसी भी प्रकार की अनधिकृत गतिविधि को रोकने के लिए ‘उच्च स्तरीय निगरानी समिति’ (HLMC) और ‘जिला स्तरीय निगरानी समिति’ (DLMC) पहले से कार्यरत हैं, जिन्हें अब और अधिक शक्तियां दी जाएंगी।
पर्यावरण सुरक्षा के साथ स्थानीय लोगों को राहत देने पर जोर
बैठक में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि नियमों की सख्ती के बीच स्थानीय ग्रामीणों और निवासियों को विकास कार्यों और मूलभूत सुविधाओं (जैसे सड़क, बिजली, पानी व स्वास्थ्य) से वंचित न होना पड़े। पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय विकास के बीच सटीक संतुलन बनाने के लिए नीतियों को व्यावहारिक रूप दिया जाएगा।
अवैध निर्माणों पर शिकंजा
हाल के दिनों में भागीरथी इको सेंसेटिव जोन के भीतर कई स्थानों पर नियमों को ताक पर रखकर किए गए अवैध निर्माण के मामले सामने आए थे। पर्यावरण मंत्रालय द्वारा इस संबंध में उत्तराखंड शासन को पत्र लिखकर सख्त संज्ञान लेने को कहा गया था, जिसके बाद जिला प्रशासन ने विस्तृत जांच शुरू कर दी है।
