- नदी से मिले शव से होगा मिलान; पुलिस का दावा- बरामद शव लापता अभिषेक का, पिता ने जताई असहमति

नैनीताल:
बागेश्वर के प्रसिद्ध पिंडारी ग्लेशियर से लापता हुए 30 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर अभिषेक चौहान के मामले में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने अहम निर्देश दिए हैं। न्यायमूर्ति आलोक माहरा की एकलपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए लापता ट्रेकर के पिता (याचिकाकर्ता) को आज ही डीएनए जांच के लिए ब्लड सैंपल देने का आदेश दिया है। इसके साथ ही अदालत ने नैनीताल स्थित बीडी पांडे अस्पताल की प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक (PMO) को याचिकाकर्ता का ब्लड सैंपल तुरंत सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए हैं।
पुलिस का दावा- पिंडर नदी से बरामद हुआ शव, DNA मिलान जरूरी
सुनवाई के दौरान मामले के जांच अधिकारी (IO) विवेक चंद अदालत में पेश हुए। उन्होंने कोर्ट को बताया कि सर्च ऑपरेशन के दौरान 27 जून को कीर्ति नगर के पास पिंडर नदी से एक अज्ञात शव बरामद किया गया था। विभाग को आशंका है कि यह शव लापता ट्रेकर अभिषेक चौहान का ही है।
जांच अधिकारी ने बताया कि शव का डीएनए सैंपल सुरक्षित रख लिया गया है। शव की पुख्ता पहचान और पुष्टि के लिए अभिषेक के पिता के डीएनए (ब्लड सैंपल) से उसका मिलान कराना अनिवार्य है।
पिता बोले- ‘शव 50 साल के व्यक्ति का, मेरा बेटा 30 साल का था’
दूसरी ओर, याचिकाकर्ता व अभिषेक के पिता देशराज ने पुलिस के दावे पर असहमति जताई। उनके अधिवक्ता ने अदालत में तर्क दिया कि पिंडर नदी से मिला शव उनके बेटे का नहीं है। पिता का कहना है कि जिस शव का सैंपल लिया गया है, वह करीब 50 वर्षीय व्यक्ति का प्रतीत होता है, जबकि उनका बेटा मात्र 30 वर्ष का है।
याचिकाकर्ता ने मांग की कि बरामद शव का दोबारा सैंपल लेकर पारदर्शी जांच कराई जाए और उनके बेटे की तलाश के लिए सर्च ऑपरेशन को लगातार जारी रखा जाए।
29 मई से लापता है शामली का सॉफ्टवेयर इंजीनियर
- कौन हैं अभिषेक: उत्तर प्रदेश के शामली निवासी 30 वर्षीय अभिषेक चौहान पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं।
- कब हुए लापता: 29 मई को पिंडारी ग्लेशियर की ट्रैकिंग पूरी कर लौटते समय वे अचानक लापता हो गए थे।
- सर्च ऑपरेशन: घटना के बाद पुलिस, एसडीआरएफ (SDRF) और वन विभाग की टीमों ने सघन तलाशी अभियान चलाया, लेकिन उनका कोई सुराग नहीं लग सका।
- हाईकोर्ट की शरण: बेटे का कोई पता न चलने पर पिता देशराज ने उत्तराखंड हाईकोर्ट में याचिका दायर कर सघन खोजबीन अभियान जारी रखने की गुहार लगाई थी।
