- 12वीं पास छात्राओं को 51-51 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि न मिलने पर जताई नाराजगी; पूछा- अब तक क्यों नहीं मिला लाभ?

नैनीताल: उत्तराखंड में 12वीं पास मेधावी छात्राओं को ‘नंदा गौरा योजना’ के तहत मिलने वाली आर्थिक सहायता रोके जाने पर उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ शाह की खंडपीठ ने सरकार और महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग से तीखे सवाल करते हुए पूछा कि आखिरकार अब तक पात्र बालिकाओं को योजना का लाभ क्यों नहीं दिया गया?
सुनवाई के दौरान अदालत ने बेहद सख्त मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि, “यदि सरकार के पास योजना संचालित करने के लिए बजट ही नहीं है, तो ऐसी योजनाओं को बंद कर देना चाहिए।” हाईकोर्ट ने संबंधित विभागों को चार सप्ताह के भीतर स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए हैं।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से पैरवी कर रहे वकील ने दलील दी कि बजट का मामला वर्तमान में वित्त विभाग के पास विचाराधीन है और सरकार जल्द ही इसके लिए आवश्यक धनराशि जारी करने वाली है।
इस पर याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने कड़ा विरोध जताते हुए कहा कि लंबे समय से बजट न मिलने के कारण गरीब परिवारों की बालिकाओं की उच्च शिक्षा बुरी तरह प्रभावित हो रही है। उन्होंने अदालत से आग्रह किया कि यह एक कल्याणकारी योजना है और बिना किसी भेदभाव व देरी के सभी पात्र छात्राओं के खातों में समय पर प्रोत्साहन राशि भेजी जानी चाहिए ताकि उनके भविष्य से खिलवाड़ न हो।
यह पूरा मामला चमोली जिले की सामाजिक कार्यकर्ता ममता नेगी द्वारा दायर जनहित याचिका (PIL) के माध्यम से सामने आया है। याचिका में उठाए गए मुख्य बिंदु:
- सत्र 2022-23 का मामला: चमोली जिले में वर्ष 2022-23 में 12वीं (इंटरमीडिएट) परीक्षा पास करने वाली 439 बालिकाओं ने नियमानुसार वर्ष 2023 में ही अपने स्कूलों के माध्यम से सभी जरूरी दस्तावेज जमा कर दिए थे।
- 51 हजार की प्रोत्साहन राशि: योजना के तहत उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए प्रत्येक पात्र बालिका को ₹51,000 की एकमुश्त सहायता राशि दी जानी है।
- ₹2.45 करोड़ का बजट अटका: संबंधित विभाग ने सरकार से कुल ₹2 करोड़ 45 लाख के बजट की मांग की थी, लेकिन लंबा समय बीत जाने के बावजूद शासन स्तर से बजट मंजूर नहीं किया गया।
हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी पक्षों को विस्तृत जवाब दाखिल करने को कहा है और मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद मुकर्रर की है।
