- कांग्रेस पर लगाया तुष्टीकरण का आरोप; राष्ट्रगीत के इतिहास को लेकर प्रदेश भर में जनजागरण अभियान चलाएगी भाजपा

देहरादून: राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के गायन को लेकर कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बीच सियासी तकरार तेज हो गई है। देहरादून में सोमवार को भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कांग्रेस पर विभाजनकारी राजनीति और तुष्टीकरण का आरोप लगाया। हालांकि, इस दौरान एक सवाल के जवाब में उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि दशकों तक लोगों को इसके पूर्ण स्वरूप से दूर रखा गया, जिसके चलते आज अधिकांश लोगों को इसके दो छंद (लाइनों) से ज्यादा कंठस्थ नहीं हैं।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने कहा कि कांग्रेस कार्यसमिति द्वारा 1937 के प्रस्ताव को दोबारा स्वीकार करना और राष्ट्रगीत के केवल दो छंद गाने की वकालत करना उनकी पुरानी तुष्टीकरण की राजनीति को दर्शाता है।
- इतिहास का हवाला: उन्होंने 1923 के काकीनाडा अधिवेशन का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय भी राष्ट्रगीत के गायन को लेकर विरोध हुआ था और कांग्रेस आज भी उसी विभाजनकारी मानसिकता को आगे बढ़ा रही है।
- गांधीजी के विचारों की अनदेखी: भट्ट ने कहा कि महात्मा गांधी ने ‘वंदे मातरम्’ को धर्म की सीमाओं से परे राष्ट्रीय चेतना का प्रतीक माना था, लेकिन कांग्रेस ने केवल गांधीजी के नाम का राजनीतिक इस्तेमाल किया और उनके विचारों को दरकिनार कर दिया।
पत्रकारों द्वारा जब यह पूछा गया कि क्या खुद भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं को वंदे मातरम् पूरा याद है, तो महेंद्र भट्ट ने स्पष्टता से कहा:
“दशकों तक रही कांग्रेस की सरकारों ने देशवासियों को वंदे मातरम् के पूर्ण स्वरूप और उसके ऐतिहासिक महत्व से दूर रखा। यही कारण है कि आज बहुत से लोगों को इसके दो छंद से ज्यादा याद नहीं हैं। लेकिन नियमित गायन और अभ्यास से धीरे-धीरे यह लोगों के व्यवहार में शामिल होगा।”
उन्होंने आगे कहा कि वंदे मातरम् का सम्मान केवल गायन तक सीमित नहीं है। यदि कोई व्यक्ति पूरा गीत नहीं गा सकता, तो वह अपने सभी कामकाज रोककर इसके सम्मान में खड़ा हो सकता है। राष्ट्रगीत के प्रति अंतर्मन में सम्मान की भावना होना सबसे महत्वपूर्ण है।
पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत द्वारा वंदे मातरम् विवाद को ‘जेन-जी (युवा पीढ़ी) के असली मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश’ बताए जाने पर भट्ट ने कड़ा पलटवार किया।
उन्होंने कहा कि हरीश रावत जैसे वरिष्ठ नेता को युवाओं और अपने कार्यकर्ताओं को राष्ट्रगीत के सम्मान के लिए प्रेरित करना चाहिए। आजादी के आंदोलन के गीतों और क्रांतिकारियों के बलिदान की गाथा को नई पीढ़ी तक पहुंचाना सभी दलों और नागरिकों का कर्तव्य है।
महेंद्र भट्ट ने जानकारी दी कि हाल ही में दिल्ली में हुई पार्टी की राष्ट्रीय कार्यसमिति में वंदे मातरम् को लेकर प्रस्ताव पारित किया गया है। इसके तहत:
- भाजपा कार्यकर्ता अब घर-घर और युवाओं के बीच जाकर वंदे मातरम् के इतिहास, अर्थ और स्वतंत्रता संग्राम में इसके महत्व को लेकर जनजागरण अभियान चलाएंगे।
- पार्टी का कहना है कि वंदे मातरम् किसी राजनीतिक दल की बपौती नहीं, बल्कि पूरे देश का राष्ट्रगीत और मां भारती की वंदना है, जिसके संवैधानिक सम्मान से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
