UTTARAKHAND

अब बिल्डर नहीं कर पाएंगे धोखाधड़ी; रेरा का बड़ा फैसला- प्रोजेक्ट के बैंक खातों का विज्ञापन देना होगा अनिवार्य

देहरादून | उत्तराखंड रेरा (भूसंपदा विनियमन एवं विकास प्राधिकरण) के नवनियुक्त अध्यक्ष नरेश सी० मठपाल की पहली ही बोर्ड बैठक में प्रदेश के रियल इस्टेट सेक्टर के लिए बड़े बदलावों पर मुहर लग गई है। अब प्रमोटरों के लिए अपने प्रोजेक्ट के बैंक खातों को सार्वजनिक करना और एक विशेष ‘रिजर्व फंड’ बनाना जरूरी होगा।
तीन बड़े फैसले जो बदल देंगे उत्तराखंड का रियल इस्टेट मार्केट

  1. बैंक खातों का होगा सार्वजनिक ऐलान
    अब केवल रेरा रजिस्ट्रेशन नंबर से काम नहीं चलेगा। प्रोजेक्ट का सर्टिफिकेट मिलते ही प्रमोटर को एक नेशनल और एक स्टेट लेवल के अखबार में अपने प्रोजेक्ट से संबंधित बैंक खातों की जानकारी विज्ञापन के जरिए देनी होगी। यही नहीं, प्रोजेक्ट साइट के होर्डिंग्स और ब्रोशर पर भी बैंक डिटेल लिखनी होगी ताकि खरीदार किसी गलत खाते में पैसा जमा न करें।
  2. ग्राहकों की मर्जी बिना नहीं बढ़ेगी डेडलाइन
    अगर बिल्डर प्रोजेक्ट की समय सीमा बढ़वाना चाहता है या पुराने रजिस्ट्रेशन में बदलाव करना चाहता है, तो प्राधिकरण पहले अखबारों में पब्लिक नोटिस जारी करेगा। खरीदारों से आपत्तियां मांगी जाएंगी। यदि खरीदार संतुष्ट नहीं हैं और आपत्ति दर्ज करते हैं, तो उनका समाधान होने के बाद ही बिल्डर को मोहलत मिलेगी।
  3. 5 साल के लिए लॉक होगा रिजर्व फंड
    प्राधिकरण ने ‘रिजर्व फंड’ बनाने पर सहमति दी है। खरीदारों से मिले पैसे का एक हिस्सा अलग खाते में जमा होगा। इसे प्रोजेक्ट पूरा होने के 5 साल बाद तक बिल्डर नहीं निकाल पाएगा। अगर बिल्डर ग्राहकों का रिफंड नहीं देता या फ्लैट में कोई कमी ठीक नहीं करता, तो प्राधिकरण इस फंड से पैसा निकालकर ग्राहकों की भरपाई करेगा।

अवैध कॉलोनाइजरों पर भी एक्शन की तैयारी
पहाड़ों में अवैध प्लॉटिंग पर रहेगा शिकंजा
कार्यभार संभालने के बाद नरेश सी० मठपाल ने साफ कहा कि राज्य में पारदर्शी इकोसिस्टम बनाना उनकी प्राथमिकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि आने वाले समय में विशेषकर पर्वतीय जिलों में अवैध रूप से रियल इस्टेट का धंधा करने वालों पर सख्त शिकंजा कसा जाएगा।
बिल्डर अब यह नहीं कह पाएंगे…
“बैंक खाता बदल गया है, इस दूसरे खाते में पेमेंट कर दीजिए।” (अब खाता सार्वजनिक होगा)
“बिना बताए प्रोजेक्ट की तारीख बढ़ा ली।” (अब खरीदार की आपत्ति सुनी जाएगी)
“पैसा नहीं है, रिफंड कहाँ से दें?” (अब रिजर्व फंड से होगी वसूली)

Tv10 India

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