ऊखीमठ, रुद्रप्रयाग: हर हर महादेव और जय बाबा केदार के जयघोषों के साथ, भगवान केदारनाथ की पंचमुखी चल विग्रह उत्सव डोली आज, शनिवार को, अपने शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर, ऊखीमठ में पूरे विधि-विधान के साथ विराजमान हो गई है।इस अवसर पर पूरा माहौल शिवमय हो गया और भक्तों का उत्साह देखते ही बन रहा था। अब अगले छह महीनों तक बाबा केदार की पूजा-अर्चना और दर्शन यहीं ओंकारेश्वर मंदिर में संपन्न होंगे।
बाबा केदार की डोली की यात्रा केदारनाथ धाम के कपाट भैया दूज के अवसर पर 23 अक्टूबर को शीतकाल के लिए बंद होने के बाद शुरू हुई थी। अपनी यात्रा के दौरान, डोली ने विभिन्न पड़ावों पर भक्तों को दर्शन दिए। पहले दिन डोली रामपुर में रात्रि विश्राम के लिए रुकी और अगले दिन 24 अक्टूबर को गुप्तकाशी के विश्वनाथ मंदिर पहुंची, जहाँ भक्तों ने फूल और अक्षतों से भव्य स्वागत किया।
आज सुबह, गुप्तकाशी से डोली ने ओंकारेश्वर मंदिर के लिए प्रस्थान किया। रास्ते में शेरसी, बडासू, तरसाली, जामू और फाटा जैसे स्थानों पर स्थानीय व्यापारियों और भक्तों ने डोली का भव्य स्वागत किया और बाबा का आशीर्वाद लिया।सेना के बैंड की भक्तिमय धुनों के बीच डोली जब ओंकारेश्वर मंदिर पहुंची, तो पूरा वातावरण भक्तिरस में सराबोर हो गया।
मंदिर पहुंचने पर, पुजारियों और वेदपाठियों की उपस्थिति में डोली ने मंदिर की परिक्रमा की, जिसके बाद पंचमुखी मूर्ति को गर्भ गृह में स्थापित किया गया।इस मौके पर केदारनाथ विधायक आशा नौटियाल सहित कई गणमान्य व्यक्ति और बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
बदरी-केदार मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने बताया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मार्गदर्शन में शीतकालीन यात्रा को बढ़ावा देने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि वे ओंकारेश्वर मंदिर पहुंचकर भगवान केदारनाथ की शीतकालीन पूजा में शामिल हों।
गौरतलब है कि ओंकारेश्वर मंदिर को पंच केदारों का शीतकालीन गद्दीस्थल भी कहा जाता है, और ऐसी मान्यता है कि यहां एक साथ पांच केदारों के दर्शन होते हैं। बाबा केदार के यहां विराजमान होने के साथ ही, अब शीतकालीन यात्रा का भी शुभारंभ हो गया है।
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