रुड़की: हिमालय की गोद में, समुद्र तल से 12 हजार फीट से अधिक की ऊंचाई पर स्थित भगवान शिव के विश्व प्रसिद्ध तुंगनाथ मंदिर को सुरक्षित रखने के लिए एक ऐतिहासिक वैज्ञानिक पहल शुरू की गई है। 1,000 साल पुरानी इस प्राचीन धरोहर में आए संरचनात्मक झुकाव (structural tilt) के बाद, देश के अग्रणी संस्थान केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान (CBRI) रुड़की ने इसके संरक्षण की जिम्मेदारी संभाल ली है। आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों के जरिए इस ऐतिहासिक धरोहर का उपचार किया जाएगा, ताकि इसकी मजबूती बरकरार रहे।
CBRI के निदेशक प्रोफेसर आर प्रदीप कुमार ने बताया कि संरक्षण की प्रक्रिया को बेहद वैज्ञानिक और चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा:
संस्थान के निदेशक के अनुसार, अगस्त 2025 में इस परियोजना के लिए संपर्क किया गया था। वर्तमान में सीबीआरआई के पांच वैज्ञानिकों की एक विशेष टीम इस अभियान पर काम कर रही है:
| मार्ग | साधन और रूट विवरण |
| गढ़वाल मार्ग से | नजदीकी रेलवे स्टेशन ऋषिकेश और हवाई अड्डा जौलीग्रांट (देहरादून) है। यहाँ से बस या टैक्सी द्वारा उखीमठ होते हुए चोपता पहुंचें। चोपता से मंदिर के लिए 4 किलोमीटर की पैदल चढ़ाई है। |
| कुमाऊं मार्ग से | नजदीकी रेलवे स्टेशन रामनगर, हल्द्वानी या काठगोदाम हैं। रामनगर से गैरसैंण-कर्णप्रयाग होते हुए चोपता जा सकते हैं। हल्द्वानी/काठगोदाम से रोडवेज की बस या टैक्सी उपलब्ध हैं। |
| यात्रा का सही समय | तुंगनाथ दर्शन के लिए मई से अक्टूबर तक का समय सबसे उपयुक्त माना जाता है। इसके बाद यहां भारी बर्फबारी होती है, जिससे रास्ते बंद हो जाते हैं। |
मास्टर प्लान के तहत तैयार हो रहा चार मंजिला सब-जिला अस्पताल, 31 अगस्त तक काम…
गांव लौटे प्रवासियों के अनुभवों और स्वरोजगार के प्रयासों को साझा करने पर जोर सितंबर…
देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय स्थित 'मुख्य सेवक सदन' में मुख्यमंत्री उद्यमशाला…
टिहरी गढ़वाल :उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देने, स्थानीय उत्पादों को…
नैनीताल उत्तराखंड उच्च न्यायालय को नैनीताल से हल्द्वानी के बेल बाबा क्षेत्र में स्थानांतरित करने…
रुड़की :उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र की जीवनरेखा मानी जाने वाली कोसी नदी बेसिन पर आने…