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अलकनंदा का रौद्र रूप: रुद्रप्रयाग में जलमग्न हुई भगवान शिव की प्रतिमा

  • चमोली सहित ऊपरी क्षेत्रों में भारी बारिश के बाद उफान पर नदियां, बेलनी क्षेत्र के लिए प्रशासन ने जारी किया अलर्ट; कई मोटरमार्ग बंद होने से जनजीवन अस्त-व्यस्त।

रुद्रप्रयाग:
चमोली जिले सहित ऊपरी हिमालयी क्षेत्रों में लगातार जारी मूसलाधार बारिश का गंभीर असर अब रुद्रप्रयाग जनपद में दिखाई देने लगा है. यहां बहने वाली अलकनंदा नदी ने विकराल रूप धारण कर लिया है और इसका तेज बहाव चेतावनी स्तर (वार्निंग लेवल) के बेहद करीब पहुंच गया है. नदी के लगातार बढ़ते जलस्तर ने तटीय इलाकों में बसे लोगों की चिंता बढ़ा दी है, जबकि स्थानीय प्रशासन पूरी तरह से अलर्ट मोड पर आ गया है.

जलमग्न हुई भगवान शिव की विशाल प्रतिमा

अलकनंदा नदी में आए इस उफान का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि नदी तट से करीब 20 से 25 मीटर की दूरी पर स्थापित भगवान शिव की विशालकाय प्रतिमा पूरी तरह से पानी में डूब गई है. केवल एक दिन पहले तक सामान्य दिखने वाली यह प्रतिमा अब जलमग्न हो चुकी है और नदी अपने मूल बहाव क्षेत्र से कई मीटर बाहर तक फैल गई है. इस समय चारों ओर पानी का भयावह सैलाब नजर आ रहा है, जो नदी के रौद्र रूप का प्रत्यक्ष प्रमाण है.

घाटों पर आवाजाही बंद, प्रशासन ने दी चेतावनी

नदी के बढ़ते जलस्तर के कारण तट पर बने सभी प्रमुख घाट पानी में समा गए हैं और वहां तक जाने वाले संपर्क मार्ग भी डूब चुके हैं. सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने लोगों के नदी किनारे जाने पर पूरी तरह से रोक लगा दी है. पुलिस और आपदा प्रबंधन की टीमें संवेदनशील इलाकों में लगातार गश्त कर रही हैं.

नदी का बढ़ता जलस्तर अब रुद्रप्रयाग शहर के बेलनी क्षेत्र के लिए भी खतरा बनता जा रहा है. जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंदन सिंह रजवार ने नागरिकों से विशेष सावधानी बरतने की अपील की है. उन्होंने कहा, “स्थानीय लोग विशेष रूप से रात के समय नदी के जलस्तर पर कड़ी नजर बनाए रखें. नदी या नालों के किनारे बिल्कुल न जाएं और किसी भी आपात स्थिति के उत्पन्न होने पर तुरंत जिला प्रशासन या आपदा नियंत्रण कक्ष को सूचित करें.” इसके साथ ही प्रशासन ने लोगों से अफवाहों से बचने और केवल मौसम विभाग द्वारा जारी आधिकारिक दिशा-निर्देशों का पालन करने का आग्रह किया है.

त्रियुगीनारायण मार्ग बंद: पैदल चलकर विवाह स्थल पहुंचे दूल्हा-दुल्हन

इस मूसलाधार बारिश ने रुद्रप्रयाग में आम जनजीवन और धार्मिक यात्राओं को भी बुरी तरह प्रभावित किया है. भारी बारिश और भूस्खलन के कारण विश्व प्रसिद्ध त्रियुगीनारायण मंदिर को जोड़ने वाला मुख्य मोटरमार्ग कई स्थानों पर मलबे के कारण क्षतिग्रस्त हो गया, जिससे सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं.

इस मार्ग के बंद होने से विवाह समारोह के लिए त्रियुगीनारायण पहुंचे कई दूल्हा-दुल्हन, उनके परिजनों और बारातियों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा. शादी के शुभ मुहूर्त को देखते हुए दूल्हा-दुल्हन और बारातियों को मजबूरन गाड़ियों से उतरना पड़ा और वे अपना आवश्यक सामान हाथ में लेकर क्षतिग्रस्त पहाड़ी रास्तों से पैदल ही आगे बढ़े. तमाम विपरीत परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने पैदल सफर तय किया और त्रियुगीनारायण मंदिर पहुंचकर विवाह की रस्में पूरी कीं.

उल्लेखनीय है कि त्रियुगीनारायण मंदिर को पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव और माता पार्वती का पावन विवाह स्थल माना जाता है, जिसके कारण देश-विदेश से नवविवाहित जोड़े यहां आशीर्वाद लेने और विवाह संपन्न कराने आते हैं.

व्यापार संघ अध्यक्ष महेंद्र सेमवाल ने बताया कि रविवार रात की भीषण बारिश के बाद त्रियुगीनारायण मोटरमार्ग पर कई जगह मलबा आने से वाहनों की आवाजाही ठप है. उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि इस महत्वपूर्ण मार्ग को जल्द से जल्द सुचारु किया जाए ताकि श्रद्धालुओं, स्थानीय व्यापारियों और ग्रामीणों को राहत मिल सके.

विजयनगर–तैला मोटरमार्ग भी हुआ ठप

भारी बारिश की मार जिले के अन्य हिस्सों पर भी पड़ी है. लगातार हो रही बारिश की वजह से विजयनगर-तैला मोटरमार्ग भी गंगानगर के समीप सड़क का एक बड़ा हिस्सा ध्वस्त होने से पूरी तरह बंद हो गया है. मार्ग बंद होने के कारण स्थानीय ग्रामीणों को आवश्यक कार्यों के लिए वैकल्पिक और लंबे रास्तों का सहारा लेना पड़ रहा है.

लोक निर्माण विभाग (PWD) और जिला प्रशासन की टीमें बंद मार्गों को खोलने के लिए लगातार मलबे को हटाने के काम में जुटी हुई हैं. प्रशासन ने सभी यात्रियों और स्थानीय जनता से अपील की है कि वे बेहद खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्राओं से बचें, भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरतें और सरकारी एडवाइजरी का कड़ाई से पालन करें.

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