60 साल बाद ‘अग्नि अश्व वर्ष’ का महासंयोग: 12 गुना पुण्यदायी होगी इस बार की कैलाश मानसरोवर यात्रा
तिब्बती ज्योतिष के अनुसार एक परिक्रमा देगी 12 यात्राओं के बराबर का पुण्य; हिंदू, बौद्ध, जैन और बोन धर्मावलंबियों के लिए बना दुर्लभ आध्यात्मिक अवसर।
देहरादून:
कैलाश मानसरोवर की पवित्र धार्मिक यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह वर्ष इतिहास के सबसे अनोखे और आध्यात्मिक रूप से फलदायी अवसरों में से एक साबित होने जा रहा है. तिब्बती पंचांग के अनुसार, इस वर्ष एक ऐसा दुर्लभ खगोलीय और ज्योतिषीय संयोग बन रहा है जो पूरे 60 साल बाद आता है. इस महासंयोग को तिब्बती ज्योतिष में ‘अग्नि अश्व वर्ष’ (Fire Horse Year) का नाम दिया गया है.
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ‘अग्नि अश्व वर्ष’ के दौरान कैलाश पर्वत की परिक्रमा करने वाले श्रद्धालुओं को सामान्य वर्षों की तुलना में कई गुना अधिक आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होता है. इस काल में की गई मात्र एक परिक्रमा का पुण्यफल सामान्य काल में की जाने वाली 12 अलग-अलग यात्राओं के बराबर माना जाता है.
चार प्रमुख धर्मों का साझा आस्था केंद्र
कैलाश पर्वत और मानसरोवर झील का धार्मिक व आध्यात्मिक महत्व केवल हिंदू धर्म तक ही सीमित नहीं है. बौद्ध, जैन और बोन धर्म के अनुयायी भी इसे अपनी आस्था का सर्वोच्च केंद्र मानते हैं. प्रत्येक वर्ष दुनिया भर से विभिन्न मतों के हजारों श्रद्धालु इस दुर्गम मार्ग को पार कर शिव के धाम और मोक्ष के द्वार तक पहुंचते हैं. लेकिन इस बार ‘अग्नि अश्व वर्ष’ की उपस्थिति ने चारों धर्मों के लोगों के भीतर इस यात्रा को लेकर एक विशेष उत्साह भर दिया है.
क्या है तिब्बती पंचांग का ‘अग्नि अश्व वर्ष’?
तिब्बती ज्योतिषीय परंपरा में समय और वर्षों का निर्धारण 12 पशुओं के एक निश्चित चक्र के आधार पर किया जाता है. इस चक्र में क्रमशः चूहा, बैल, बाघ, खरगोश, ड्रैगन, सांप, घोड़ा, बकरी, बंदर, मुर्गा, कुत्ता और सूअर शामिल हैं. इनमें सातवें स्थान पर आने वाला ‘घोड़े का वर्ष’ (अश्व वर्ष) ऊर्जा, शक्ति, गति, स्वतंत्रता और आध्यात्मिक प्रगति का प्रतीक माना जाता है.
यह परंपरा पांच मूल तत्वों—अग्नि, जल, पृथ्वी, वायु (मेटल) और लकड़ी से भी जुड़ी हुई है. जब 12 पशुओं का चक्र इन पांच तत्वों से मिलता है, तो कुल 60 वर्षों का एक बड़ा ब्रह्मांडीय चक्र तैयार होता है. पूरे छह दशकों (60 वर्ष) के लंबे अंतराल के बाद इस बार ‘घोड़े’ के साथ ‘अग्नि’ तत्व का विशेष संयोग बना है, जिसे ‘अग्नि अश्व वर्ष’ कहा जाता है. ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, यह संयोजन ब्रह्मांड में सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक चेतना का संचार करता है.
तिब्बत में दिखेगा आध्यात्मिक ‘महाकुंभ’ का नजारा
इस वर्ष को केवल एक साधारण तीर्थयात्रा के रूप में नहीं, बल्कि एक दिव्य धार्मिक महोत्सव के रूप में देखा जा रहा है. ‘अग्नि अश्व वर्ष’ के दौरान तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में कई दुर्लभ और पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठान, विशाल प्रार्थना सभाएं तथा आध्यात्मिक सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं. स्थानीय स्तर पर इसे किसी महाकुंभ की तरह ही मनाया जाता है. इस अवधि में यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं को न केवल मानसरोवर के पवित्र जल में स्नान और कैलाश परिक्रमा का अवसर मिलेगा, बल्कि वे तिब्बती संस्कृति के इन भव्य व दिव्य आयोजनों को बेहद करीब से देख और महसूस कर सकेंगे.
बौद्ध मान्यताओं में भी इस वर्ष का अत्यधिक महत्व है, क्योंकि भगवान बुद्ध का जन्म और उन्हें ज्ञान की प्राप्ति इसी अश्व वर्ष के दिव्य संयोग में हुई थी[3]. ऐसे में मोक्ष और मुक्ति की कामना लेकर यात्रा पर निकलने वाले शिवभक्तों और अन्य श्रद्धालुओं के लिए यह यात्रा जीवन भर संजोकर रखने वाला एक अविस्मरणीय और पावन अनुभव बनने जा रही है.
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