नई दिल्ली: ज्येष्ठ मास के आने वाले मंगलवार को “बड़ा मंगल,” “बूढ़ा मंगल,” या “बुढ़वा मंगल” कहा जाता है। इस दिन भगवान हनुमान की विधिवत उपासना करने से उनका आशीर्वाद प्राप्त किया जा सकता है। इस साल, पहला बड़ा मंगल 28 मई को, दूसरा बड़ा मंगल 4 जून को, तीसरा बड़ा मंगल 11 जून को, और चौथा बड़ा मंगल 18 जून को पड़ रहा है।मान्यता है कि इस महीने के मंगलवार को हनुमत आराधना करने से बड़ा से बड़ा संकट दूर हो जाता है. बड़ा मंगल को लेकर दो कथाएं बहुत प्रचलित है- पहली त्रेतायुग की और दूसरी द्वापर युग की
बुढ़वा मंगल से जुड़ी त्रेतायुग की कथा:
रामायण हो या फिर रामचरित मानस, सभी ग्रंथों में उल्लेखित है कि ज्येष्ठ महीने के मंगलवार को ही सीता हरण के बाद ऋषिमूक्य पर्वत पर जंगल में भटकते हुए श्रीराम और लक्ष्मण हनुमान से मिले थे. भक्त और भगवान के इसी मिलन के उपलक्ष में आज तक ये परंपरा चली आ रही है
बुढ़वा मंगल से जुड़ी द्वापर युग की कथा:
बुढ़वा मंगल से जुड़ी एक पौराणिक कहानी उस दौर की भी है, जब द्वापरयुग में कौरव पांडव आपस में युद्ध कर रहे थे. कहते हैं कि महाभारत काल में द्रौपदी के कहने पर भीम कमल पुष्प लेने के लिए गंधमादन पर्वत पर स्थित कमल सरोवर के पास पहुंच गए. लेकिन वहां हनुमान जी रास्ते में लेटे हुए थे और उनकी पूंछ रास्ते को घेरे हुई थी. भीम उसे लांघकर जाना नहीं चाहते थे. भीम ने हनुमान जी से कहा कि वे अपनी पूंछ को रास्ते से हटा लें ताकि वे आगे जा सके.
हनुमान जी मुस्कुराते हुए भीम की बातों को अनसुना कर दिया. हनुमान जी ने कहा कि तुम तो बलशाली हो, खुद ही मेरी पूंछ हटा दो और आगे चले जाओ. भीम इस बात से चिढ़ गए और हनुमान जी की पूंछ हटाने लगे. पहली बार में पूंछ टस से मस न हुई. फिर भीम ने पूरी ताकत लगाकर पूंछ को हटानी चाही, लेकिन वो पूंछ को हिला भी न सके.हनुमान जी ने भीम के बलशाली होने के घमंड को क्षण भर में ही तोड़ दिया. जब भीम थक हार गए, तब उनको लगा कि यह कोई आम वानर नहीं हो सकते हैं. भीम ने हनुमान जी से क्षमा मांगी और अपने वास्तविक स्वरूप में दर्शन देने का आग्रह किया. तब हनुमान जी मुस्कुराए और फिर अपने विराटस्वरूप का दर्शन भीम को कराया. फिर भीम हनुमान जी का आशीर्वाद लेकर वापस लौट आए. इस प्रकार से भीमसेन का घमंड चकनाचूर हो गया. कहते हैं कि तभी से इस से इस ज्येष्ठ माह के प्रत्येक मंगलवार को बड़ा मंगल, बूढ़ा मंगल या बुढ़वा मंगल कहा जाने लग.
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