प्रमुख बिंदु:
चमोली/जोशीमठ:
उत्तराखंड के प्रसिद्ध धाम बदरीनाथ मंदिर में चढ़ावे की धनराशि और दान सामग्री की चोरी के मामले में पुलिस और विशेष जांच दल (SIT) की कार्रवाई तेज हो गई है. मामले में गिरफ्तार किए गए बदरी-केदार मंदिर समिति (BKTC) के पूर्व मंदिर अधिकारी व तत्कालीन थाली भेंट गणना प्रभारी राजेंद्र चौहान को शनिवार को न्यायालय में पेश किया गया. दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने आरोपी राजेंद्र चौहान को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है.
बदरीनाथ के थानाध्यक्ष महादेव उनियाल ने बताया कि आरोपी को कानूनी प्रक्रियाओं के तहत कोर्ट के समक्ष पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजा गया है.
राजेंद्र चौहान बदरीनाथ मंदिर में करीब 28 वर्षों की सेवा के बाद इसी साल 30 जून को सेवानिवृत्त हुए थे. सेवानिवृत्ति के कुछ ही दिनों बाद उन पर चढ़ावे में हेराफेरी के गंभीर आरोप लगे. एसआईटी ने शुक्रवार को उन्हें ज्योतिर्मठ से पूछताछ के लिए बदरीनाथ थाने बुलाया था, जहां करीब चार घंटे की गहन पूछताछ और पुख्ता सबूतों के आधार पर उन्हें हिरासत में लेकर गिरफ्तार कर लिया गया.
जांच के दौरान जब पुलिस और एसआईटी की टीम ने थाली भेंट गणना कक्ष की सीसीटीवी फुटेज का बारीकी से विश्लेषण किया, तो गंभीर अनियमितताएं सामने आईं. फुटेज में साफ देखा गया कि आरोपी राजेंद्र चौहान 22, 25 और 29 जून को गणना के दौरान कई बार 500 रुपये के नोटों की गड्डियां, बहुमूल्य दान सामग्री और आभूषण अपनी जेब में रख रहे थे.
जांच में यह भी स्पष्ट हुआ है कि राजेंद्र चौहान ने पूर्व में गिरफ्तार बीकेटीसी कर्मचारी प्रमोद नौटियाल के साथ मिलकर इस आपराधिक षड्यंत्र को अंजाम दिया था. बता दें कि प्रमोद नौटियाल को 12 जुलाई को गिरफ्तार किया गया था और वह फिलहाल पुरसाड़ी कारागार में बंद है.
इस मामले में मंदिर प्रबंधन और रिकॉर्डिंग व्यवस्था भी जांच के दायरे में है. मंदिर समिति ने शुरुआत में एसआईटी को 45 दिन की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग उपलब्ध कराने का दावा किया था, लेकिन जांच टीम को केवल 13 दिन की ही रिकॉर्डिंग मिल सकी है. शेष 32 दिनों का डेटा फिलहाल गायब है. एसआईटी अब आईटी विशेषज्ञों की मदद से इस डिलीट किए गए डेटा को रिकवर कराने का प्रयास कर रही है. अधिकारियों का मानना है कि यदि पूरी फुटेज रिकवर हो जाती है, तो इस मामले में कई अन्य महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं.
एसआईटी इस पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है. जांच के दौरान मिली संदिग्ध गतिविधियों के आधार पर मंदिर समिति के कई अन्य कर्मचारी भी संदेह के घेरे में हैं. जांच के पर्यवेक्षक व पुलिस उपाधीक्षक मदन सिंह बिष्ट ने बताया कि मामले के प्रत्येक पहलू की निष्पक्ष और साक्ष्य आधारित जांच की जा रही है. आने वाले दिनों में जांच के दायरे को बढ़ाते हुए कुछ और संदिग्धों से भी पूछताछ की जा सकती है.
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