नैनीताल। सरोवर नगरी नैनीताल में बाहरी जिलों और राज्यों के दोपहिया वाहनों (बाइक्स) से ₹100 प्रवेश शुल्क (टोल टैक्स) वसूलने के फैसले पर भारी बवाल मच गया है। इस निर्णय के विरोध में नैनीताल नगर पालिका परिषद के भीतर ही खुली बगावत शुरू हो गई है। आठ सभासदों ने इस फैसले को ‘जनविरोधी’ बताते हुए कुमाऊं मंडलायुक्त और जिलाधिकारी से उत्तराखंड नगर पालिका अधिनियम की धारा-34 के तहत वर्तमान बोर्ड को भंग करने की मांग की है।
वहीं, स्थानीय भाजपा विधायक सरिता आर्या ने भी सड़क पर उतरकर इस फैसले का विरोध किया और कार्यकर्ताओं के साथ पालिका प्रशासन का पुतला दहन किया।
नगर पालिका सभागार में आयोजित प्रेसवार्ता में पूर्व पालिका अध्यक्ष मुकेश जोशी ‘मोंटू’, वरिष्ठ सभासद भगवत सिंह रावत, गजाला कमाल, जितेंद्र पांडेय ‘जीनू’, अंकित चंद्रा, रमेश चंद्रा और काजल आर्या सहित अन्य सभासदों ने संयुक्त रूप से पालिका प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोला।
पूर्व पालिका अध्यक्ष मुकेश जोशी और सभासद जितेंद्र पांडे ने आरोप लगाया कि पालिका में महत्वपूर्ण निर्णय बिना पर्याप्त चर्चा और बिना व्यापक सहमति के लिए जा रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि इस चुंगी ठेके को शुरू करने में इतनी जल्दबाजी क्यों दिखाई गई और बोर्ड की नियमित बैठकें क्यों नहीं बुलाई जा रहीं? सभासदों ने चेतावनी दी है कि यदि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कार्रवाई नहीं की गई, तो वे हाईकोर्ट की शरण लेंगे।
इस विवाद में अब राजनीतिक मोड़ भी आ गया है। क्षेत्रीय भाजपा विधायक सरिता आर्या ने अपनी ही सरकार के तहत काम कर रहे पालिका प्रशासन के इस फैसले का कड़ा विरोध किया है। वे भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ गांधी चौक पर एकत्रित हुईं और पालिका प्रशासन का पुतला दहन किया। उन्होंने इस पूरी टेंडर प्रक्रिया को तत्काल निरस्त करने और मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है।
पालिका अध्यक्ष का पक्ष: “पहले सबने सहमति दी थी, अब विरोध राजनीति से प्रेरित”
“विरोध करने वाले अधिकांश सभासद पहले बोर्ड की बैठक में इस प्रस्ताव का समर्थन कर चुके हैं। अब उनका यह विरोध केवल राजनीतिक लाभ के लिए है। बाहरी दोपहिया वाहनों पर शुल्क लगाने का निर्णय राज्य सरकार के गजट नोटिफिकेशन के अनुरूप लिया गया है। धंसाव की समस्या से जूझ रही मॉल रोड पर यातायात का दबाव कम करने और अनियंत्रित वाहनों को रोकने के लिए यह व्यवस्था नगर के हित में लागू की गई है।”— सरस्वती खेतवाल, अध्यक्ष, नैनीताल नगर पालिका
अधिवक्ताओं का पक्ष: “रोजाना आने-जाने वालों पर बढ़ेगा आर्थिक बोझ”
“कोर्ट के काम से हर दिन सैकड़ों वकील और फरियादी बाहर से नैनीताल आते हैं। उनसे रोजाना ₹100 वसूलना न्यायसंगत नहीं है। पालिका को अपना यह फैसला तुरंत वापस लेना चाहिए।”— स्थानीय अधिवक्ता संघ
दरअसल, नगर पालिका के नए बोर्ड के गठन के बाद पालिका की माली हालत सुधारने के लिए टोल टैक्स में वृद्धि करने पर सहमति बनी थी। पूर्व में चार पहिया वाहनों का टोल ₹110 से बढ़ाकर ₹200 और ₹300 करने तथा दोपहिया वाहनों पर ₹100 शुल्क तय किया गया था। लंबे समय तक यह लागू नहीं हो पाया था, लेकिन हाल ही में नए टेंडर के बाद ठेकेदार द्वारा इसे धरातल पर उतारते ही यह विवाद खड़ा हो गया।
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