UTTARAKHAND

बदरीनाथ मार्ग पर 5 तीर्थयात्रियों की बची जान: धामी सरकार का STEMI प्रोग्राम बना लाइफलाइन; 14 जगहों पर ECG और ‘क्लॉट बस्टर’ की सुविधा

चमोली | चारधाम यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए उत्तराखंड सरकार की स्वास्थ्य व्यवस्थाएं ‘संजीवनी’ साबित हो रही हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर बदरीनाथ यात्रा मार्ग पर शुरू किया गया एसटीईएमआई (STEMI) प्रोग्राम गंभीर हृदय रोगियों के लिए जीवनदाता बन गया है। अब तक इस तकनीक की मदद से 5 श्रद्धालुओं को मौत के मुंह से सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है।

खबर की बड़ी बातें:

  • सफलता: 148 यात्रियों की ईसीजी जांच हुई, 5 गंभीर मरीजों की जान बचाई गई।
  • सुविधा: बदरीनाथ मार्ग पर 14 स्थानों पर ईसीजी और थ्रोम्बोलिसिस (थक्का घोलने) की सुविधा।
  • रेस्क्यू: एक गंभीर मरीज को हेली एम्बुलेंस से एम्स ऋषिकेश एयरलिफ्ट किया गया।
  • टेक्नोलॉजी: आई-पैड युक्त डिजिटल ईसीजी मशीनों से तत्काल मिल रही रिपोर्ट।

148 यात्रियों की जांच, 47 की हो रही मॉनिटरिंग

स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, यात्रा मार्ग पर अब तक 148 श्रद्धालुओं की ईसीजी जांच की गई है। इनमें से 5 की स्थिति अत्यंत गंभीर थी, जिन्हें समय पर ‘क्लॉट बस्टर’ दवाएं देकर स्थिर किया गया। इसके अलावा 47 अन्य यात्रियों के हृदय में असामान्य लक्षण मिले हैं, जिन्हें डॉक्टरों की विशेष निगरानी में रखा गया है।

कहां-कहां मिल रही है सुविधा?

यात्रा मार्ग पर श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए चमोली जिले में 14 केंद्र बनाए गए हैं:

  1. मुख्य सेंटर: बदरीनाथ धाम, जोशीमठ, गडोरा, मंडल, लंगासू, गौचर और गोविंदघाट।
  2. स्पेशल थ्रोम्बोलिसिस सेंटर: जोशीमठ, गोपेश्वर और कर्णप्रयाग (यहाँ गंभीर अटैक आने पर थक्का घोलने का उपचार उपलब्ध है)।

डिजिटल तकनीक से बच रही जान

एसीएमओ डॉ. वैष्णव कृष्णा ने बताया कि सभी सेंटरों पर डिजिटल ईसीजी मशीनें दी गई हैं। जैसे ही किसी यात्री की जांच होती है, उसकी रिपोर्ट तुरंत स्वास्थ्य निदेशालय और बड़े अस्पतालों के विशेषज्ञों तक पहुंच जाती है। इससे डॉक्टर बिना समय गंवाए मरीज को सही उपचार देने का फैसला ले पाते हैं।

समझिए क्या है STEMI और थ्रोम्बोलिसिस?

  • STEMI (हार्ट अटैक का गंभीर रूप): इसमें दिल की नस पूरी तरह ब्लॉक हो जाती है। अगर मिनटों में इलाज न मिले, तो जान जाना तय है।
  • थ्रोम्बोलिसिस (क्लॉट बस्टर): यह एक ऐसी दवा (थेरेपी) है जो खून की नसों में जमे थक्के को तुरंत घोल देती है, जिससे दिल तक खून का दौरा फिर से शुरू हो जाता है।
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