UTTARAKHAND

उत्तराखंड में आपदा से हुए नुकसान का जायजा लेने पहुंची अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय टीम, प्रभावित जिलों के लिए रवाना

देहरादून। उत्तराखंड में इस साल मानसून के दौरान भारी बारिश, भूस्खलन और बादल फटने जैसी आपदाओं से हुई भारी क्षति का आकलन करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा गठित एक सात सदस्यीय अंतर-मंत्रालयी टीम सोमवार को देहरादून पहुंच गई है। गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव आर. प्रसन्ना के नेतृत्व में यह टीम राज्य के सर्वाधिक प्रभावित जिलों का दौरा कर नुकसान का जायजा लेगी और अपनी रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपेगी।

देहरादून पहुंचने के बाद टीम ने राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र में आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास सचिव विनोद कुमार सुमन और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक बैठक की। इस बैठक में अधिकारियों ने केंद्रीय टीम को प्रदेश में आपदा से हुए नुकसान पर एक विस्तृत प्रस्तुतिकरण दिया, ताकि टीम को जमीनी हकीकत और मौजूदा स्थिति से अवगत कराया जा सके।

छह सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों का करेगी दौरा

यह केंद्रीय दल राज्य के छह सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों- उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, पौड़ी, बागेश्वर और नैनीताल का स्थलीय निरीक्षण करेगा। टीम इन जिलों में आपदा से टूटी सड़कों, क्षतिग्रस्त पुलों, तबाह हुए घरों और कृषि भूमि को हुए नुकसान का सीधे तौर पर आकलन करेगी।इस टीम में गृह मंत्रालय के अलावा कृषि, जल शक्ति, ऊर्जा, सड़क परिवहन और ग्रामीण विकास जैसे मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हैं।

राज्य सरकार ने मांगी है 5700 करोड़ से ज्यादा की मदद

गौरतलब है कि इस वर्ष उत्तराखंड में मानसून के दौरान सामान्य से बहुत अधिक बारिश दर्ज की गई है, जिससे पूरे प्रदेश में भारी तबाही हुई है। राज्य सरकार ने आपदा से हुए नुकसान की भरपाई और भविष्य के लिए आपदा रोधी बुनियादी ढांचे के निर्माण हेतु केंद्र सरकार से 5,702.15 करोड़ रुपये के विशेष आर्थिक पैकेज का अनुरोध किया है।

राज्य सरकार के आंकड़ों के अनुसार, 1 अप्रैल से अब तक आपदा की घटनाओं में 77 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 94 लोग लापता हैं और 68 घायल हुए हैं। इसके अलावा, 229 घर पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गए हैं और 1,828 घरों को आंशिक रूप से नुकसान पहुंचा है।

केंद्रीय टीम की रिपोर्ट के आधार पर ही केंद्र सरकार राज्य को राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष (NDRF) से अतिरिक्त वित्तीय सहायता प्रदान करेगी। इस दौरे से आपदा प्रभावित क्षेत्रों में राहत और पुनर्वास कार्यों में तेजी आने की उम्मीद है।

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