चमोली/देहरादून: उत्तराखंड में भारी बारिश और भूस्खलन ने तबाही मचा रखी है, जिससे जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। सोमवार को चमोली जिले में भारत-चीन सीमा को जोड़ने वाला रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण नीति-मलारी राष्ट्रीय राजमार्ग भारी भूस्खलन के कारण बंद हो गया। भापकुंड के पास हुए इस भूस्खलन में सड़क का करीब दस मीटर हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है, जिससे यातायात ठप हो गया है। मार्ग बंद होने से भारतीय सेना, आईटीबीपी और सीमांत गांवों का संपर्क तहसील मुख्यालय से कट गया है।
क्या हुआ और कितना है असर?
सोमवार दोपहर करीब तीन बजे भारी बारिश के चलते भापकुंड के पास अचानक पहाड़ी का एक बड़ा हिस्सा टूटकर सड़क पर आ गिरा। इस घटना के कारण सड़क का एक बड़ा हिस्सा बह गया और दोनों तरफ वाहन फंस गए।
कब तक खुलेगा रास्ता?
सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) की टीमें मलबा हटाने और सड़क की मरम्मत के काम में जुटी हुई हैं। हालांकि, लगातार हो रही बारिश और पहाड़ों से गिर रहे पत्थरों के कारण राहत एवं बचाव कार्य में दिक्कतें आ रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि हाईवे के मंगलवार, 22 जुलाई तक खुलने की संभावना है। ज्योतिर्मठ के उपजिलाधिकारी चंद्रशेखर वशिष्ठ ने बताया कि बीआरओ और संबंधित एजेंसी को हाईवे जल्द से जल्द सुचारू करने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रदेश भर में बारिश का कहर जारी
मौसम विभाग ने उत्तराखंड के कई जिलों के लिए 22 जुलाई को भी भारी से बहुत भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। प्रदेश में आपदा जैसे हालात बने हुए हैं और मौसम विभाग का अनुमान है कि 24 जुलाई तक बारिश का यह दौर जारी रह सकता है। सोमवार को ही रुद्रप्रयाग जिले में बदरीनाथ हाईवे भी भूस्खलन के कारण करीब दो घंटे तक बंद रहा था, जहां पहाड़ी से बड़ी-बड़ी चट्टानें गिरने लगी थीं।प्रशासन लगातार लोगों से अपील कर रहा है कि वे बहुत जरूरी होने पर ही यात्रा करें और सतर्क रहें।
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