चमोली। देवभूमि के शांत पहाड़ों में इस बार शराब की खपत ने पिछले सारे रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं। सीमांत जनपद चमोली में वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान शराब की बिक्री से आबकारी विभाग की झोली भर गई है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इस एक साल में जिले के लोगों ने 92.84 करोड़ रुपए की शराब पी डाली, जो चमोली के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है।
रिकॉर्ड तोड़ कमाई से उत्साहित आबकारी विभाग ने भविष्य के लिए और भी बड़े राजस्व लक्ष्य निर्धारित किए हैं। विभाग की रणनीति अब कमाई को 100 करोड़ के पार ले जाने की है:
विभाग का मानना है कि पारदर्शी व्यवस्था और बेहतर प्रबंधन की वजह से राजस्व में यह भारी बढ़ोतरी देखने को मिली है।
एक तरफ सरकार और आबकारी विभाग इस बढ़ती इनकम को अपनी सफलता मान रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ समाज का एक बड़ा वर्ग इस ट्रेंड से डरा हुआ है।
जिला आबकारी अधिकारी लक्ष्मण बिष्ट ने बताया कि जिले में शराब की सभी दुकानें नियमों के तहत संचालित की जा रही हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि दुकानों की ओर से विभाग का कोई भी बकाया (देयता) शेष नहीं है और राजस्व वृद्धि नियमानुसार हुई है।
राजस्व बढ़ाने की होड़ और बढ़ते सामाजिक दुष्प्रभावों के बीच अब आम जनता के बीच चर्चा तेज हो गई है। सवाल यह उठ रहा है कि क्या केवल राजस्व के आंकड़े ही विकास का पैमाना होने चाहिए, या फिर पहाड़ की जवानी को नशे की गर्त में जाने से बचाने के लिए कड़े कदम उठाने की जरूरत है?
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