देहरादून: उत्तराखंड में सनातन धर्म की अटूट आस्था का प्रतीक ‘चारधाम यात्रा’ इस महीने की 19 तारीख से शुरू होने जा रही है। एक ओर जहां श्रद्धालुओं में भारी उत्साह है और अब तक 8 लाख से अधिक लोग पंजीकरण करा चुके हैं, वहीं दूसरी ओर यात्रा मार्ग पर बढ़ते ‘डेंजर जोन’ (संवेदनशील क्षेत्र) सरकार और प्रशासन के लिए चिंता का विषय बने हुए हैं।
प्रदेश में 19 अप्रैल को यमुनोत्री और गंगोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ ही यात्रा का विधिवत आगाज हो जाएगा। इसके बाद 22 अप्रैल को केदारनाथ धाम और 23 अप्रैल को बदरीनाथ धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। परंपरा के अनुसार, यात्रा यमुनोत्री से शुरू होकर बदरीनाथ धाम के दर्शन के साथ संपन्न होती है।
आंकड़े बताते हैं कि चारधाम यात्रा के प्रति लोगों का आकर्षण साल दर साल बढ़ रहा है:
इस साल यात्रा मार्ग पर भूस्खलन (Landslide) की समस्या पहले से अधिक गंभीर नजर आ रही है। आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार, पिछले साल जहां 53 बड़े लैंडस्लाइड जोन थे, वहीं इस साल इनकी संख्या बढ़कर 100 हो गई है।
पुलिस विभाग ने सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए पुख्ता इंतजाम किए हैं:
श्रद्धालुओं को यात्रा के दौरान कुछ खास संवेदनशील इलाकों में बेहद सावधान रहने की जरूरत है:
यात्रा को सुगम बनाने के लिए स्वास्थ्य, लोक निर्माण विभाग (PWD), जल संस्थान, बिजली, पर्यटन और परिवहन विभाग सहित 20 से अधिक विभाग समन्वय के साथ काम कर रहे हैं। आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन ने बताया कि सभी जिला प्रशासनों को अलर्ट कर दिया गया है ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।
निष्कर्ष:
चारधाम यात्रा न केवल आस्था का संगम है, बल्कि यह उत्तराखंड की आर्थिकी और पहचान से भी जुड़ी है। प्रशासन का लक्ष्य तकनीक और बेहतर प्रबंधन के जरिए इस साल की यात्रा को अब तक की सबसे सुरक्षित और सुगम यात्रा बनाना है।
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